Bettiah | भूपेश राय|
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित ऐतिहासिक भीखना ठोरी रेलवे स्टेशन पर वर्ष 2015 से ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बंद।
वर्ष 2024 में केवल गौनाहा तक शुरू हुआ रेल परिचालन; राजस्व गांव का दर्जा न होने से ठोरी रेल नेटवर्क से कटा, व्यवसाय ठप।
गौनाहा। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित भीखना ठोरी रेलवे स्टेशन का अस्तित्व अब खतरे में है। साल 2015 से यहां ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह ठप है। कभी इस स्टेशन के होने से नेपाल से आने वाले लोग नरकटियागंज बाजार से रोजमर्रा का सामान आसानी से खरीद लेते थे, जिससे उन्हें सस्ती दरों पर भारतीय वस्तुएं मिल जाती थीं। बाद में जब नरकटियागंज से गौनाहा तक बड़ी रेल लाइन बिछाने का काम शुरू हुआ, तब स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि भीखना ठोरी तक भी ट्रेन पहुंचेगी।
हालांकि, साल 2024 में ट्रेन का परिचालन केवल गौनाहा तक ही शुरू किया गया और ठोरी को रेल नेटवर्क से पूरी तरह काट दिया गया। अब आशंका है कि आने वाली पीढ़ियां इस ऐतिहासिक स्टेशन का नाम सिर्फ किताबों में ही पढ़ पाएंगी, जिसे कभी अंग्रेजों ने आखेट (शिकार) के उद्देश्य से बनवाया था। ठोरी निवासी पूर्व मुखिया दयानन्द सहनी, मोतीलाल पासवान, पुन्ना सिंह, जीविका सीएम सीमा देवी व प्रमोद साह ने बताया कि ट्रेन बंद होने से पर्यटकों का आना रुक गया है, जिससे स्थानीय व्यापार पर बुरा असर पड़ा है। स्थानीय समाजसेवी मोतीलाल पासवान ने बताया कि सरकारी रिकॉर्ड में भीखना ठोरी राजस्व गांव नहीं है, लेकिन यदि ऐसा है तो यहां मध्य विद्यालय, आंगनबाड़ी, पोस्ट ऑफिस, नल-जल योजना और मतदान का अधिकार क्यों दिया गया? ग्रामीणों का मानना है कि राजस्व गांव का दर्जा न होने के कारण ही रेलवे का परिचालन बंद कर दिया गया।
Bettiah | Gaunaha: Bhikhna Thori railway station remains closed for 11 years, trade hits due to lack of rail connectivity
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