HomeUncategorizedआईएआरआई पटना के छात्रों ने सीखा वर्मीकंपोस्ट बनाने का वैज्ञानिक तरीका

आईएआरआई पटना के छात्रों ने सीखा वर्मीकंपोस्ट बनाने का वैज्ञानिक तरीका

माला सिन्हा

पीपराकोठी :आईसीएआर-आरसीईआर के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पटना के छात्र अपने ‘ग्रामीण कृषि कार्य अनुभव’ (रावे) कार्यक्रम के तहत कृषि विज्ञान केंद्र पिपराकोठी में इन दिनों रुके हुए हैं। इस दौरान छात्रों ने समेकित कृषि प्रणाली मॉडल के अंतर्गत केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्ट) को खुद बनाकर वैज्ञानिक तरीकों से तैयार करना सीखा. प्रशिक्षण सत्र के दौरान केंद्र की विषय वस्तु विशेषज्ञ (शस्य विज्ञान / एरोनोमी) डॉ. अर्पिता नाल्या ने छात्र-छात्राओं को वैज्ञानिक विधि से वर्मीकंपोस्ट तैयार करने का पूरा तरीका समझाया। उन्होंने बताया कि केंचुआ खाद बनाने के लिए मानक आकार का गड्ढा (पिट) तैयार किया जाता है. इसमें मुख्य रूप से सतह पर भोजन करने वाली (एपिजैइक) केंचुए की विशेष प्रजाति ‘आइसेनिया फेटिडा’ का उपयोग किया जाता है, जो तेजी से कचरा खाकर उत्तम खाद बनाती है. गड्ढे को भरते समय सबसे पहले मिट्टी और फसल अवशेषों की एक आधार परत बिछाई जाती है. इसके बाद बारीक कटे हुए फसल अवशेषों और आंशिक रूप से सड़े हुए गोबर की परतें बारी-बारी से बिछाई जाती हैं. गड्ढे में ऊपर थोड़ी जगह खाली छोड़ते हुए अंत में केंचुओं का कल्चर डाला जाता है. डॉ. अर्पिता ने बताया कि केंचुओं के समुचित विकास के लिए आवश्यक नमी बनाए रखी जाती है, जिसके लिए गड्ढे को जूट की बोरियों से ढककर नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाता है. समय पूरा होने पर तैयार वर्मीकंपोस्ट की सबसे बड़ी पहचान यह है कि इससे किसी प्रकार की दुर्गंध नहीं आती, बल्कि सौंधी-सौंधी मिट्टी की महक आती है. खाद गहरे भूरे रंग की और चायपत्ती के समान महीन दानेदार हो जाती है, तथा इसमें केंचुओं की संख्या भी काफी बढ़ जाती है. सामान्य कंपोस्ट और गोबर की खाद की तुलना में केंचुआ खाद कहीं अधिक पौष्टिक जैविक घटक है. इसका उपयोग विशेष रूप से किचन गार्डन, फूलों की खेती (फ्लोरीकल्चर) और उच्च मूल्य वाले वृक्षारोपण में किया जाता है. छात्रों ने निष्कर्ष निकाला कि चूँकि यह खाद कृषि और जैविक कचरे से तैयार होती है, इसलिए किसान इसे बाजार में अच्छे दामों पर बेचकर अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं और जैविक खेती में आत्मनिर्भर बन सकते हैं. छात्रों का यह पूरा ‘रावे’ प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं समेकित कृषि प्रणाली का प्रायोगिक सत्र कृषि विज्ञान केंद्र, पिपराकोठी के प्रधान वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. अरविन्द कुमार सिंह की देखरेख और निर्देशन में सफलतापूर्वक आयोजित किया जा रहा है.

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