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Sunday, July 19, 2026
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कड़क अनुशासन से दोस्ती तक का सफर सुपरहीरो बने पापा, फादर्स डे आज,

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बदल गया है पिता की भूमिका का दायरा, अब घर के बजट से लेकर बच्चों के डायपर बदलने और करियर काउंसलिंग तक हर मोर्चे पर आगे।

Bettiah.[नरकटियागंज से अखिलेश्वर मिश्र के पुत्र की ​विशेष रिपोर्ट】

बेतिया।आज जून का तीसरा रविवार है। यह रविवार हमारे जीवन के लिए बहुत ही खास है क्योकि आज पितृ दिवस है। वह पिता, जो कभी घर में दाखिल होता था तो बच्चे अदब से अपनी किताबें खोलकर बैठ जाते थे, आज वही पिता अपने बच्चों का सबसे बड़ा दोस्त बन चुका है। एक पिता जो अपनी इच्छाओं को मारकर बच्चों के सपनों की ऊंची उड़ान के लिए जमीन तैयार करता है। लेकिन आज के दौर में पिता के कुछ दायरे बदल गए है। हालांकि पिछले एक दशक में पिता बनने के अहसास की परिभाषा पूरी तरह बदल गई है। अब पिता केवल कमाकर लाने वाला एक जिम्मेदार और सख्त अनुशासनप्रिय अभिभावक नहीं रह गया है। बल्की आज का न्यू-एज डैड, बच्चों के जन्म से ही उनकी परवरिश में बराबर का भागीदार है। डायपर बदलने से लेकर, रात को लोरी सुनाने, स्कूल प्रोजेक्ट्स बनाने और बेटियों की विदाई पर खुलकर रोने तक, पिता ने अपनी भावनाओं को व्यक्त करना सीख लिया है।

फादर्स डे पर सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक पापा के साथ रील्स और भावुक पोस्ट की बाढ़ आ गई है। युवाओं का कहना है कि मां अगर घर की धड़कन है, तो पिता उस घर की रीढ़ की हड्डी है, जिसके बिना घर खड़ा नहीं रह सकता। पितृ दिवस को लेकर शहर के कॉलेजों और कॉर्पोरेट दफ्तरों में कामकाजी युवाओं से जब बात की गई, तो एक अलग ही नजरिया सामने आया। युवतियों का कहना था कि उनके लिए उनके पिता ‘परफेक्ट मैन’ की परिभाषा हैं, जिन्होंने उन्हें हमेशा आत्मनिर्भर बनना सिखाया।

वहीं युवाओं के लिए पिता एक ऐसे मेंटॉर हैं, जिन्होंने बिना भाषण दिए, अपने संघर्षों से उन्हें ईमानदारी और मेहनत का पाठ सिखाया। पहचान जिससे है, वो कोई और नहीं, मेरे पापा हैं,ज़मीन से लेकर आसमाँ तक जो पहुँचा दे, वो फरिश्ता और कोई नहीं मेरे पापा हैं।अँगुलियों को पकड़कर चलना सिखाया, हर मुश्किल में हौसला बढ़ाया है। बच्चों का कहना है कि अब समय आ गया है कि हम पापा की सेहत और उनकी खुशियों का ख्याल ठीक वैसे ही रखें, जैसे उन्होंने बचपन में हमारा रखा था। फादर्स डे केवल साल का एक दिन नहीं है, बल्कि यह हर दिन उस इंसान को सम्मान देने का संकल्प है, जो अपनी जिम्मेदारियो के बोझ तले दबकर भी बच्चों को ब्रांडेड कपड़े पहनाने से पीछे नही हटता है। आज का दिन अपने पिता के पास बैठने, उनका हाथ थामने और सिर्फ यह कहने का है, थैंक यू पापा, आप दुनिया के सबसे अच्छे पापा हैं।

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