-अच्छी आमदनी का ज़रिया है यह पौधा
-पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय महोगनी वृक्ष की सुधार पर कर रहा व्यापक अनुसंधान
माला सिन्हा
पीपराकोठी : बढ़ती आबादी, शहरीकरण और फर्नीचर-निर्माण क्षेत्र की बढ़ती मांग के कारण महोगनी (स्वीटेनिया मैक्रोफिला या स्वीटेनिया महागोनी) बिहार के किसानों के लिए एक बेहतरीन दीर्घकालिक आय का स्रोत बन सकती है. बिहार की उपजाऊ मिट्टी, नदीय इलाके और अनुकूल मौसम इस उच्च मूल्य वाली वाणिज्यिक लकड़ी की प्रजाति को उगाने के लिए काफी उपयुक्त हैं. अफ्रीकन महोगनी और अन्य उन्नत किस्में राज्य में अच्छी वृद्धि दिखा रही हैं. यह न केवल आर्थिक लाभ देती है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. किसान राष्ट्रीय वनरोपण योजना, वन विभाग और बिहार सरकार से महोगनी की खेती की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं. उन्नत किस्मों (जैसे अफ्रीकन या होन्डूरन) के चयन से बेहतर परिणाम अच्छी संभावनाएं हैं. डॉ. हेमंत और डॉ. रुशल के अनुसार, महोगनी सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली लकड़ी (टिंबर) वाली फसलों में से एक है, जिसे खेतों की मेड़ पर मौजूदा फसल प्रणाली के साथ उगाया जा सकता है. यह न केवल अच्छी आमदनी का ज़रिया बनेगी, बल्कि विंडब्रेक का भी काम करेगी. वर्तमान में पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय, पीपराकोठी में महोगनी वृक्ष की संतति सुधार पर व्यापक अनुसंधान कार्य किया जा रहा है तथा किसानों की आय में वृद्धि हेतु उच्च गुणवत्ता वाले रोपण सामग्री का उत्पादन एवं वितरण किया जा रहा है. यह कार्य महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. कुन्दन किशोर के मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संचालित किया जा रहा है. इच्छुक किसान उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय से विस्तृत जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं. बिहार में खेती की उपयुक्तता महोगनी मुख्य रूप से मध्य और दक्षिण अमेरिका की मूल प्रजाति है, लेकिन भारत में इसे सफलतापूर्वक उगाया जा रहा है. इसकी लकड़ी गहरे लाल-भूरे रंग की, बेहद मजबूत, टिकाऊ और पानी प्रतिरोधी होती है. यह लग्जरी फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियां, आंतरिक सजावट, और उच्च गुणवत्ता वाले वाद्ययंत्र बनाने के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है. इसके बीज, पत्तियां और छाल का भी औषधीय उपयोग होता है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी निरंतर मांग के कारण निर्यात की भी अच्छी संभावनाएं हैं. बिहार में महोगनी की खेती अत्यंत संभावनापूर्ण है. राज्य के पटना, समस्तीपुर, भागलपुर, मुंगेर और तराई बेल्ट वाले क्षेत्र बेतिया, पूर्वी चंपारण, शिवहर, दरभंगा, मुजफ्फरपुर एवं गोपालगंज में यह अच्छी वृद्धि करता है. खासकर गंगा के किनारे के इलाकों की उपजाऊ मिट्टी इसके लिए आदर्श है. बिहार और नेपाल के तराई क्षेत्र में इसकी सर्वोत्तम वृद्धि दर्ज की गई है. मिट्टी, जलवायु , रोपण और देखभाल महोगनी को गहरी, उपजाऊ और अच्छी जल निकासी वाली दोमट या बलुई दोमट मिट्टी पसंद है. इसे 15 डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान और 1200-2500 मिलीमीटर वार्षिक वर्षा वाले गर्म और आर्द्र मौसम की जरूरत होती है, जो बिहार के मानसून मौसम से पूरी तरह मेल खाता है.
ऐसे लगाये पौधे : रोपण का सबसे अच्छा समय जून से सितंबर तक है. आमतौर पर 3बाई 3 मीटर या 4 बाई 4 मीटर की दूरी पर 100 से 150 पौधे प्रति एकड़ लगाए जा सकते हैं. किसानों को नर्सरी से स्वस्थ 1-2 वर्ष के पौधे लेने चाहिए, जिनकी कीमत लगभग 50 से 80 रुपये प्रति पौधा होती है. रोपण के लिए 2 बाई 2 फीट आकार के गड्ढे खोदे जाते हैं. गड्ढे में 20 किलो गोबर की खाद और उचित मात्रा में एनपीके मिलाना चाहिए. शुरुआती 2-3 वर्षों में नियमित सिंचाई जरूरी है, जबकि बाद में पेड़ अपेक्षाकृत कम पानी में भी जीवित रह सकते हैं. यह प्रजाति कीट-रोगों से अपेक्षाकृत कम प्रभावित होती है, लेकिन प्रारंभिक वर्षों में उचित देखभाल आवश्यक है. पेड़ आमतौर पर 10 से 15 वर्ष में व्यावसायिक कटाई के लिए तैयार हो जाते हैं.
आर्थिक और पर्यावरणीय फायदे : महोगनी उच्च मूल्य वाली फसल है. एक परिपक्व पेड़ से 15 से 25 घन फीट लकड़ी प्राप्त हो सकती है, जिसका बाजार मूल्य गुणवत्ता के आधार पर 1,000 से 2,500 रुपये प्रति घन फीट तक है. एक एकड़ में 120-150 पेड़ लगाने पर 12-15 वर्ष बाद 20 लाख से अधिक रुपये की आय संभव है. किसान इसे गेहूं, सब्जी, मक्का और अन्य फसलों के साथ अंतःफसली (इंटरक्रॉपिंग) करके अतिरिक्त आय भी प्राप्त कर रहे हैं. बिहार के किसान महोगनी, अर्जुन और सागवान जैसी प्रजातियों की ओर बढ़ रहे हैं और अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं. महोगनी की खेती मिट्टी के कटाव को रोकने, कार्बन संग्रहण बढ़ाने और जैव विविधता संरक्षण में सहायक होती है. यह प्राकृतिक जंगलों पर पड़ रहे दबाव को कम करती है और स्थानीय पर्यावरण को संतुलित रखने में मदद करती है. साथ ही यह छाया प्रदान करके अन्य फसलों की उपज बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होती है. बिहार के किसानों के लिए महोगनी एक लाभदायक निवेश है. यह न केवल आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करती है बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान देती है.












