देश वाणी। दिलीप दुबे
मोतीहारी। बिहार में राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे अवैध रूप से संचालित हो रहे ढाबों, भोजनालयों और व्यावसायिक निर्माणों पर अब पूरी तरह से गाज गिरने वाली है। उच्चतम न्यायालय द्वारा सुओ मोटो रिट पिटीशन (सिविल) संख्या 9/2025 में पारित कड़े आदेश के आलोक में बिहार सरकार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने राज्य के सभी नगर आयुक्तों, कार्यपालक पदाधिकारियों और जिलाधिकारियों को युद्धस्तर पर कार्रवाई करने का निर्देश जारी किया है।
सरकार के अवर सचिव रणविजय कुमार द्वारा जारी आधिकारिक पत्र (ज्ञापांक:-11/न०वि०/विविध-15/2026) के अनुसार, राष्ट्रीय राजमार्गों के राइट ऑफ वे के भीतर किसी भी प्रकार के नए या पुराने अनधिकृत ढांचे को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
डीएम को 60 दिनों की सख्त समय-सीमा दी गई है। इसके अंतर्गत सभी अवैध एवं अनधिकृत ढांचों को चिन्हित कर हटाने का आदेश दिया गया है। इसकी संयुक्त और सीधी जिम्मेदारी जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को सौंपी गई है।
राष्ट्रीय राजमार्ग सुरक्षा क्षेत्र के अंतर्गत बिना एनएचएआई या पीडब्ल्यूडी की पूर्व स्वीकृति के कोई भी नया लाइसेंस, एनओसी या व्यापार अनुमति जारी अथवा नवीनीकृत नहीं की जाएगी। राजमार्गों के किनारे वर्तमान में संचालित हो रहे सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के लाइसेंसों की 30 दिनों के भीतर गहन समीक्षा की जाएगी। आवासीय क्षेत्रों के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग के मध्य बिंदु से 40 मीटर तथा व्यावसायिक क्षेत्रों के लिए 75 मीटर के भीतर किसी भी प्रकार के लैंड यूज़ चेंज को प्रतिबंधित करने वाली अधिसूचना 60 दिनों के भीतर जारी करने का आदेश है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से 60 दिनों के भीतर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, जो राज्य की सीमाओं के पार वाहन-चालन की समय-सीमा, पार्किंग प्रवर्तन तथा कड़े दण्ड की व्यवस्था सुनिश्चित करेगी।
बिहार सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस आदेश को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बरतने वाले अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। इस कड़े कदम से आने वाले दिनों में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगने वाले जाम और सड़क दुर्घटनाओं में भारी कमी आने की उम्मीद है।












