देश वाणी। दिलीप दुबे
मोतिहारी। बिहार में पूर्ण शराबबंदी को अमलीजामा पहनाने का दावा करने वाली उत्पाद पुलिस खुद ही सवालों के घेरे में आ गई है। मोतिहारी सदर एवं मधुबन उत्पाद पुलिस द्वारा बीते दिनों की गई एक बड़ी कार्रवाई के बाद तैयार की गई जब्ती सूची और इंटरनेट मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो में भारी विसंगति देखने को मिल रही है। मामला संज्ञान में आने के बाद मद्यनिषेध प्रमंडल मुजफ्फरपुर के उपायुक्त ने मोतिहारी के सहायक आयुक्त से रिपोर्ट तलब की है। प्रमंडलीय उपायुक्त विकास सिन्हा ने बताया कि मोतिहारी के सहायक आयुक्त नीरज कुमार से मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गयी है। जांच में मद्यनिषेध विभाग के जो भी पुलिस पदाधिकारी और सिपाही दोषी पाये जाएंगे उनके विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मालूम हो कि 18 जून की रात को उत्पाद पुलिस ने बेलवामाधो गांव के समीप नेशनल हाईवे-27 से एक पिकअप गाड़ी को जब्त किया था, जिस पर मुर्गों के नीचे छिपाकर भारी मात्रा में विदेशी शराब और बीयर लायी जा रही थी। पुलिस ने मौके से दो तस्करों को भी गिरफ्तार किया था।
अगले दिन, यानी 19 जून को प्रेस को जारी आधिकारिक बयान में उत्पाद विभाग ने बताया कि गाड़ी से 675 लीटर विदेशी शराब एवं बीयर जब्त की गई है। इसके साथ ही गाड़ी पर लदे 200 मुर्गों का जिक्र किया गया, जिसमें से 148 को मृत और 52 को जिंदा दर्शाया गया।
मामले में नया मोड़ तब आया जब सदर उत्पाद थाना परिसर में पिकअप से शराब और बीयर की अनलोडिंग का एक (रील) वीडियो इंटरनेट मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इस वीडियो को देखने के बाद विभाग के दावों पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सीजर लिस्ट में दर्शाई गई मात्रा के मुकाबले वीडियो में अनलोड की गई शराब और बीयर के कार्टन की संख्या अधिक दिखाई दे रही हैं।
सूत्रों और वायरल वीडियो के अनुसार, बरामद शराब, बीयर और मुर्गों की संख्या आधिकारिक तौर पर दिखाई गई संख्या से कहीं ज्यादा थी। इस पूरी कार्रवाई में सबसे बड़ा रहस्य गाड़ी पर लदे मुर्गों को लेकर बना हुआ है। नियमानुसार, जब्त की गई शराब और बीयर को तो मालखाना प्रभारी के सुपुर्द कर दिया गया, लेकिन मुर्गों के साथ क्या किया गया, इस पर विभाग पूरी तरह मौन है। विधि विशेषज्ञों का कहना है कि नियमानुसार गाड़ी पर लदे जिंदा मुर्गों को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के तहत राजसात किया जाना चाहिए था, जो कि नहीं दिखा। यदि उत्पाद पुलिस के दावे के अनुसार 148 मुर्गे मृत थे, तो क्या उन्हें दंडाधिकारी और पशु चिकित्सक की मौजूदगी में दफनाया जाना चाहिये था तथा इस पूरी निस्तारण प्रक्रिया की अनिवार्य रूप से वीडियोग्राफी कराया जाना जरूरी था।
फिलहाल, यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि क्या विभाग इस वायरल वीडियो और जब्ती सूची के अंतर का संज्ञान लेकर कोई निष्पक्ष जांच करवाता है या फिर इस मामले को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।












