-समतल खेत में होगा बेहतर पोषण.
-खेतों में समान रूप से पानी का वितरण जरूरी
फोटो : कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ डा अंशू गंगवार
माला सिन्हा
पीपराकोठी : किसानों ने आधुनिक कृषि तकनीकों और भारत सरकार द्वारा चलायी जा रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, पीएम कुसुम योजना, पी.एम. कृषि सिंचाई योजना एवं अन्य लाभकारी योजनाओं से ढ़ेरो फायदे हो रहे है. मिट्टी जांच और उसके लाभों के लिए संतुलित मात्रा में उर्वरकों के प्रयोग जरूरी है. इसके साथ खेतों में समान रूप से पानी का वितरण सुनिश्चित करने के लिए खेत को सावधानी पूर्वक समतल करना आवश्यक है. कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि अभियांत्रिकी विशेषज्ञ डॉ. अंशू गंगवार ने बताया कि खेतों में समान रूप से पानी का वितरण सुनिश्चित करने के लिए खेत को सावधानी पूर्वक समतल करना आवश्यक है जिससे पानी की गहराई खेत में एक समान बनी रहे. इसके अलावा बीजों के अंकुरण और मिट्टी के कटाव की दृष्टि से भी समतलीकरण करना बहुत जरूरी है. खेत का अच्छे से समतलीकरण हो जाने पर पौधे पोषक तत्वों का बेहतर उपयोग कर पाते हैं एवं उच्च जल उपयोगी क्षमता भी सुनिश्चित होती है. समतलीकरण के उद्देश्य को पूरा करने हेतु लेजर लैण्ड लेवलर का प्रयोग अत्यधिक लाभकारी है.
मशीन के मुख्य भाग : लेजर लैंड लेवलर मशीन में कई भाग होते है जो इस प्रकार हैं. लेजर ट्रांसमीटर, कंट्रोल रिसीवर, नियंत्रण इकाई, स्क्रैपर, हाइड्रोलिक नियंत्रण इकाई. डा गंगवार ने बताया कि इस यंत्र का प्रयोग करने से पहले यह ध्यान रखने की जरूरत है कि खेत की गहरी व बारीक जुताई कर ली जाए तथा खेत में बहुत ही कम नमी होनी चाहिए, खेत में खरपतवार व फसल के अवशेष धान अथवा गेहूं का पुआल एवं घास आदि नहीं होना चाहिए. यह यंत्र 50-60 हॉर्स पावर के ट्रेक्टर की सहायता से चलता है. एक एकड़ भूमि को समतल बनाने के लिए लगभग दो से ढाई घंटे का समय लगता है. यदि भूमि काफी ऊबड़-खाबड़ है तो इससे अधिक समय भी लग जाता है. उन्होंने बताया कि भूमि समतलीकरण के लिए सर्वोत्तम समय सामान्यतः बुवाई या नई फसल बोने से ठीक पहले, आमतौर पर शुष्क मौसम के दौरान होता है.
लेजर लैंड लेवलर को सेट करने की कार्य-विधि : सबसे पहले लेजर स्टैंड को खेत के किसी एक किनारे पर खड़ा कर दिया जाता है. स्टैंड के ऊपर लेजर ट्रांसमीटर को फिट कर दिया जाता है. लेजर ट्रांसमीटर को 6 बोल्ट से 12 बोल्ट की बैटरी से करंट दिया जाता है. लेजर ट्रांसमीटर को ऑन करके एक तीन पैर वाले स्टैंड को सेट कर देते हैं. लेजर ट्रांसमीटर से निकलने वाली किरणें लेजर बीम से जुड़ जाते हैं. मशीन कंट्रोल रिसीवर, लेजर सेंसर, लेजर बीम को लेने के लिए लेवलर के ऊपर लगे लोहे की पाइप के ऊपर या नीचे उठाते हैं. जब लेजर सेंसर में हरी लाइट जलने लगती है उसी जगह रौड को कस दिया जाता है. इस प्रकार कंट्रोल बॉक्स में हरी लाइट जलने लगती है. इसके बाद लेजर सेंसर को ऊपर उठाने पर लेवलर नीचे और नीचे गिराने पर लेवलर ऊपर आने लगता है. लेवलर को उसी तरीके से ऊपर नीचे उठाकर सेट कर सकते हैं. सेटिंग होने के पश्चात ट्रैक्टर को स्टार्ट करके अंदर से बाहर की ओर निकलते हुए गोलाई में चलाते हैं.
लेजर लैंड लेवलर द्वारा भूमि समतलीकरण से लाभ : इसका उपयोग करने से सिंचाई में लगने वाले समय कमी आती है और सिंचाई में जल की लगभग 30 से 35 प्रतिशत तक की बचत होती है. भूमि समतल रहने के कारण आधुनिक कृषि उपकरण जैसे जीरो टिल-कम-फर्टि सीड ड्रिल, हैप्पी सीडर, मल्टी क्रॉप प्लांटर इत्यादि का प्रदर्शन अच्छा होता है. फसलों की पैदावार में लगभग 10 से 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है. लेजर लैंड लेवलर द्वारा समतल किये गये खेत में बीज दर, उर्वरक, रसायनों की लागत में कमी आती है. समतल खेत होने से बुआई का कार्य अधिक सरल और तेजी से होता है. समतल सतह पर बीजों का अंकुरण बेहतर होता है, जिससे फसल मजबूत और समान रूप से बढ़ती है. बीज, उर्वरक, रसायन और ईंधन की की खपत कम हो जाती है.
रखनी होगी सावधानियां : स्टैंड एवं लेजर ट्रांसमीटर को पैरों के बीच या बाग में सेट नहीं करना चाहिए. लेजर ट्रांसमीटर को बिजली के आसपास सेट नहीं करना चाहिए. कोहरा होने पर लेजर ट्रांसमीटर सही से कार्य नहीं करता है, अतः कोहरा की स्थिति में लेजर लैंड लेवलर को नहीं चलाना चाहिए. बैटरी पूरी तरह से चार्ज होना चाहिए, बैटरी चार्ज नहीं है तो ट्रांसमीटर कार्य नहीं करेगा.












