देश वाणी। दिलीप दुबे
मोतिहारी। बापूधाम मोतिहारी स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने आने वाले रेल यात्रियों को अब सिर्फ अपनी यात्रा की चिंता नहीं, बल्कि स्टेशन परिसर के जाम और ई-रिक्शा चालकों की दबंगई का खौफ भी सता रहा है। सर्कुलेटिंग एरिया में ई-रिक्शा चालकों के बेतरतीब वाहन खड़े करने से रोज़ाना स्थिति बेकाबू हो रही है, जिससे यात्रियों और चालकों के बीच हिंसक झड़पें आम बात हो गई हैं।
बीती मंगलवार रात भी मामूली कहासुनी के बाद स्थिति मारपीट तक पहुँच गई। हालांकि सुरक्षा बल के पहुँचने से पहले ही मनमौजी चालक निकल भागे, लेकिन यात्री सहमे हुए हैं।
इस रोजाना के सिरदर्द को खत्म करने के लिए स्टेशन प्रशासन ने एक ठोस योजना तैयार की थी। स्टेशन अधीक्षक, आरपीएफ अधिकारी और वाणिज्य विभाग की मौजूदगी में तय हुआ था कि पार्किंग एरिया की तुरंत बैरिकेडिंग की जाएगी ताकि ई-रिक्शा चालक अपनी सीमा में रहें। लेकिन इंजीनियरिंग विभाग की सुस्ती के कारण योजना कागजों से बाहर नहीं निकल सकी।
जब इस योजना पर अमल के बारे में एईएन शिवनाथ प्रसाद से संपर्क किया गया, तो उनका बेपरवाह जवाब आया कि उन्हें ऐसी किसी बैरिकेडिंग की जानकारी ही नहीं है और वे रामगढ़वा में एनआई कार्य में व्यस्त हैं।
अधिकारियों की इस खींचतान और टालमटोल की नीति का नतीजा यह है कि हर दिन हजारों यात्रियों को जाम और मारपीट के डर के बीच स्टेशन में दाखिल होना पड़ रहा है। अब सवाल यह उठता है कि क्या रेल प्रशासन किसी बड़े हादसे के बाद ही नींद से जागेगा!












