-वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों से छात्र छात्रा हुए परिचित
माला सिन्हा
पीपराकोठी : कृषि विज्ञान केंद्र में मंगलवार को आयोजित रूरल एग्रीकल्चरल वर्क एक्सपीरियंस कार्यक्रम के तहत आईसीएआर- आईएआरआई पटना हब के बीएससी कृषि के छात्र-छात्राओं को आधुनिक कृषि तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण का उद्देश्य छात्रों को पुस्तकीय ज्ञान के साथ-साथ खेतों में उपयोग होने वाली वैज्ञानिक एवं आधुनिक कृषि पद्धतियों से परिचित कराना था, ताकि वे भविष्य में किसानों के लिए बेहतर मार्गदर्शक बन सकें. कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. अरविंद कुमार सिंह के विशेष संवाद सत्र से हुई. उन्होंने छात्रों को मदर डेयरी प्रोडक्शन यूनिट की स्थापना, उसकी कार्यप्रणाली तथा कलेक्शन सेंटर के संचालन की विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने बताया कि यह केंद्र आसपास के किसानों से दूध एकत्र कर उन्हें उचित मूल्य उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. छात्रों ने डेयरी प्रबंधन और किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी समझा. इसके बाद डॉ. गायत्री के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं ने मशरूम उत्पादन इकाई का भ्रमण किया. यहां उन्हें मिल्की और ऑयस्टर मशरूम की वैज्ञानिक खेती की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया. विद्यार्थियों ने भूसे को फॉर्मेलिन और पानी के घोल में भिगोने, बड़े कंटेनर में उबालकर उसका स्टरलाइजेशन (कीटाणुशोधन) करने तथा पॉलिथीन शीट पर सुखाने की प्रक्रिया को स्वयं करके सीखा. साथ ही स्पॉन भरने, बैग तैयार करने और मशरूम उत्पादन के विभिन्न चरणों की जानकारी भी प्राप्त की. प्रशिक्षण के अगले चरण में डॉ. मनीष ने कृषि मशीनीकरण पर विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने ट्रैक्टर संचालन, रोटावेटर, डिस्क प्लो, जीरो-टिल फर्टी-सीड ड्रिल, लेजर लेवलर, हैप्पी सीडर और थ्रेशर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों की कार्यप्रणाली का प्रदर्शन किया. साथ ही बताया कि इन तकनीकों के उपयोग से खेती की लागत कम होती है, श्रम और समय की बचत होती है तथा पानी का अधिक कुशल उपयोग संभव होता है. ‘करके सीखना’ की अवधारणा पर आधारित यह प्रशिक्षण छात्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ. व्यावहारिक अनुभव के माध्यम से उनमें आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने की समझ विकसित हुई. कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक खेती, कृषि उद्यमिता और स्मार्ट फार्मिंग की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया तथा उन्हें भविष्य में कृषि क्षेत्र में नवाचार और तकनीकी बदलाव के वाहक बनने का संदेश दिया.












