सड़क पर पसरा अवैध अतिक्रमण और पार्किंग, घंटों फंसे रह रहे लोग, मूकदर्शक बनी ट्रैफिक पुलिस
देश वाणी। दिलीप दुबे
मोतिहारी। शहर को जाम के झाम से मुक्ति दिलाने के लिए जिला प्रशासन के बड़े-बड़े दावे और बैठकें हवा-हवाई साबित हो रही हैं। पिछले दिनों डीएम सौरभ जोरवाल की अध्यक्षता में नगर निगम सभागार में एक मैराथन बैठक हुई थी। इस उच्चस्तरीय बैठक में एसपी, सदर एसडीओ, सदर डीएसपी सहित जिला और पुलिस प्रशासन के तमाम आलाधिकारी मौजूद थे।
बैठक में डीएम ने कड़े तेवर दिखाते हुए सभी अधिकारियों को शहर को जाममुक्त करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। निर्देश के बाद शुरुआती दो दिन तो सड़कों पर मुस्तैदी दिखी और इसका सकारात्मक असर भी नजर आया, लेकिन अब स्थिति फिर से जस की तस हो गई है। सब कुछ पुराने ढर्रे पर लौट आया है और छतौनी की चौड़ी सड़क एक बार फिर भीषण जाम की गवाह बन रही है।
छतौनी पथ की चौड़ी सड़क से लेकर पैदल चलने वाले पाथवे तक पर दुकानदारों का कब्जा है। कदम-कदम पर ठेले, खोमचे और लीची बेचने वालों ने स्थायी ठिकाना बना लिया है। सड़क के दोनों किनारों पर बेतरतीब तरीके से गाड़ियां पार्क की जा रही हैं, जिससे वाहनों के निकलने के लिए जगह ही नहीं बचती। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक व छतौनी पुलिस के स्तर पर इस गंभीर समस्या के निदान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
इस भीषण जाम का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि दोपहर में स्कूल की छुट्टी के बाद स्कूली बच्चे घंटों इस जाम में फंसे रहते हैं। भीषण गर्मी में गाड़ियां रेंगती हैं, जिससे बच्चे भूख और प्यास से बिलबिला उठते हैं। लोगों का कहना है कि स्थिति इतनी भयावह है कि अगर गलती से कोई एम्बुलेंस इस जाम में फंस जाए, तो गंभीर मरीजों की जान पर बन आती है। इनका कहना है कि जब तक जिला प्रशासन अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त और स्थायी कानूनी कार्रवाई नहीं करता, तब तक मोतिहारी को इस जाम से निजात मिलना नामुमकिन है। दो दिन के दिखावे वाले अभियान से समस्या हल होने वाली नहीं है। लोगों ने जिलाधिकारी से इस मामले में संज्ञान लेते हुए दोषियों और लापरवाह अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।












