देश वाणी। दिलीप दुबे
मोतिहारी। भूमि सुधार उप समाहर्ता (सदर) प्रीति सिंह के एक औचक निरीक्षण ने मोतिहारी सदर अंचल में चल रहे बड़े फर्जीवाड़े की पोल खोल कर रख दी है। अंचल कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों और न्यायालय के नकली आदेशों के सहारे दाखिल-खारिज कराने का एक गंभीर मामला सामने आया है।
शनिवार को डीसीएलआर प्रीति सिंह ने मोतिहारी सदर अंचल का औचक निरीक्षण और दस्तावेजों का सत्यापन किया। इस जांच के दौरान यह पाया गया कि कुछ भू-माफिया और बिचौलिए, अंचल के कर्मचारियों के साथ साठगांठ कर अनुचित लाभ लेने की फिराक में थे। जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जालसाजों ने सीधे न्यायालय के नाम पर ही फर्जीवाड़ा कर दिया है। न्यायालय, भूमि सुधार उप समाहर्ता, सदर मोतिहारी के नाम पर दो फर्जी दाखिल-खारिज अपील वाद संख्या 788/2023-24 एवं 789/2023-24 तैयार किए गए। इन फर्जी अदालती आदेशों को बकायदा ऑनलाइन सिस्टम पर अपलोड कर दिया गया, ताकि दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को अवैध रूप से प्रभावित किया जा सके।
बिचौलियों और अंचल कर्मियों पर कस रहा शिकंजा
डीसीएलआर प्रीति सिंह ने बताया कि इस पूरे खेल में शामिल संबंधित आवेदकों, ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया से जुड़े कथित बिचौलियों और अंचल के संदेहास्पद कर्मियों की भूमिका की गहन जांच की जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी व्यक्तियों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई जा रही है। भूमि अभिलेखों और कोर्ट के आदेशों के साथ किसी भी तरह की जालसाजी एक गंभीर और गैर-जमानती अपराध है। इस रैकेट में शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।












