कर संग्राहकों और भवन मालिकों की मिलीभगत पर गिरेगी गाज, अवैध कमर्शियल उपयोग करने वालों को मिला 7 दिनों का अल्टीमेटम
देश वाणी। दिलीप दुबे
मोतिहारी। नगर निगम क्षेत्र में आवासीय भवनों का अवैध रूप से व्यावसायिक उपयोग करने वाले भवन मालिकों के खिलाफ नगर निगम प्रशासन ने बेहद सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। नगर आयुक्त आशीष कुमार के कड़े निर्देश के बाद भवन निगरानी टीम ने शहर में व्यापक जांच अभियान शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में मोतिहारी नगर निगम द्वारा एक बड़ा कदम उठाते हुए आवासीय मकानों में चल रहे अवैध व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और होटलों के नक्शे को रद्द करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
ताजा मामले में नगर निगम ने अगरवा (वार्ड संख्या- 38) निवासी शमशूर रहमान खान को एक नोटिस जारी किया है। विभाग की भवन निगरानी टीम की रिपोर्ट के अनुसार, उक्त भवन मालिक ने वर्ष 2021 में आवासीय मकान का नक्शा स्वीकृत कराया था, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर वहां अवैध रूप से होटल का संचालन किया जा रहा है। नगर निगम ने इसे बिहार भवन उपविधि 2014 और बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 का गंभीर उल्लंघन माना है।
10 लाख रुपये तक का लग सकता है जुर्माना
बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 की धारा 315 के तहत यह स्पष्ट प्रावधान है कि यदि कोई भी निर्माण भवन उपविधि से विचलन कर, उल्लंघन कर या स्वीकृत नक्शे को तोड़कर किया जाता है, तो उसे गिरा दिए जाने के साथ-साथ दोषी पर 01 लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
कर संग्राहकों की मिलीभगत और अवैध उगाही का खेल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, नगर निगम क्षेत्र में कई ऐसे आवासीय मकान हैं जिन्हें अंदरूनी मिलीभगत से कमर्शियल भाड़े पर चलाया जा रहा है। इस खेल में कुछ कर संग्राहकों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है, जो हर महीने मकान मालिकों से अवैध उगाही कर व्यावसायिक गतिविधियों को संरक्षण दे रहे हैं। नगर आयुक्त आशीष कुमार ने इस भ्रष्टाचार और नियम उल्लंघन पर कड़ा संज्ञान लिया है और स्पष्ट किया है कि संलिप्त कर्मियों और अवैध कारोबारियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
7 दिनों का मिला अल्टीमेटम
नगर निगम द्वारा जारी नोटिस में संबंधित भवन मालिक को सख्त आदेश दिया गया है कि वे पत्र प्राप्ति के 7 दिनों के अंदर उक्त भूमि पर संचालित होटल अथवा व्यावसायिक कार्य को तत्काल बंद करें। साथ ही, भवन निर्माण से संबंधित सभी वैध दस्तावेज निगम कार्यालय में उपस्थित होकर जमा करें। निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक स्पष्टीकरण और साक्ष्य प्रस्तुत नहीं करने की स्थिति में, भवन को अनाधिकृत/अवैध निर्माण की श्रेणी में मानते हुए बिहार नगरपालिका अधिनियम 2007 एवं संशोधित बिहार भवन उपविधि 2022 के तहत सुसंगत धाराओं के अधीन नियमसंगत दंडात्मक व ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।












