-जैविक खेती से लिखी सफलता की नई कहानी
फोटो : वर्मी कमपोष्ट के प्लांट को दिखाते सेवानिवृत सैनिक राजेश यादव
पीपराकोठी : प्रखंड क्षेत्र के पडौलिया गांव निवासी सेवानिवृत्त सैनिक राजेश कुमार यादव ने जैविक एवं मिश्रित खेती के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं. सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने खेती को अपना व्यवसाय बनाया और अपनी मेहनत, लगन तथा नवाचार के बल पर एक नई पहचान स्थापित की. आज वे न केवल स्वयं बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं, बल्कि सैकड़ों किसानों को भी आधुनिक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं.
कृषि विज्ञान केंद्र से मिली प्रेरणा : राजेश कुमार यादव ने कृषि विज्ञान केंद्र पीपराकोठी के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अरविन्द कुमार सिंह के मार्गदर्शन में खेती की शुरुआत की. प्रारंभ में उन्होंने पपीता और अदरक की खेती कर सफलता प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने लौकी, नेनुआ, करैला, बोड़ी, गेंदा फूल तथा ओल जैसी फसलों का उत्पादन शुरू किया. विशेष बात यह है कि वे अधिकांश फसलों का उत्पादन रासायनिक खादों के बिना जैविक तरीके से करते हैं. उनकी खेती का मॉडल आज जिले के कई किसानों द्वारा अपनाया जा रहा है.
15 वर्मी कम्पोस्ट बेड किया है स्थापित : उन्होंने बताया कि बिहार सरकार की जैविक प्रोत्साहन योजना के तहत उन्होंने 15 वर्मी कम्पोस्ट बेड स्थापित किए. सरकार की ओर से उन्हें प्रति बेड पांच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि भी प्राप्त हुई. वर्तमान में प्रत्येक बेड से चार माह के अंतराल पर लगभग 40 क्विंटल वर्मी कम्पोस्ट का उत्पादन होता है। तैयार जैविक खाद को वे 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचते हैं.
राजेश बताते हैं कि बाजार में मिलावटी खाद की समस्या को देखते हुए किसान सीधे उनके प्लांट पर पहुंचकर वर्मी कम्पोस्ट खरीदते हैं. उनका कहना है कि केंचुए लगभग 60 दिनों में उच्च गुणवत्ता वाला वर्मी कम्पोस्ट तैयार कर देते हैं, जो सब्जियों, फलों, बागवानी तथा फूलों की खेती के लिए अत्यंत लाभकारी साबित होता है. इसके उपयोग से उत्पादन लागत कम होती है तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता भी घटती है.
मिल चुकी है मिलेनियर फार्मर ऑफ इंडिया सम्मान : उनकी सफलता और नवाचार को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर “मिलेनियर फार्मर ऑफ इंडिया” सम्मान सहित कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है. आज उनकी खेती का अवलोकन करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी, वैज्ञानिक तथा विभिन्न क्षेत्रों के किसान लगातार पहुंचते हैं. राजेश कुमार यादव ने यह साबित कर दिया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, सही मार्गदर्शन और मेहनत के बल पर खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है. यही कारण है कि वे आज जिले के किसानों के लिए एक आदर्श और रोल मॉडल बन चुके हैं.












