देशवाणी
बेतिया : पश्चिम चम्पारण जिला में बिहार विधानसभा में सत्तारुढ़ दल के मुख्य सचेतक डॉ. संजीव चौरसिया का बेतिया में आर्यसमाज के प्रधान महंथ प्रसाद चौरसिया ने स्वागत किया। बेतिया में उनका प्रवास परिसदन बेतिया में हुआ, जिला प्रशासन ने पूरी सुरक्षा व्यवस्था किया। वहाँ आर्यसमाज के लोगों से मिलकर उन्होंने विशेष विचार विमर्श किया, उन्होंने आर्यसमाज के विकास और उसकी प्रगति के लिए विशेष कार्य करने को कहा। उसके बाद डॉ.चौरसिया नरकटियागंज को प्रस्थान कर गए। नरकटियागंज में डॉ.चौरसिया नरकटियागंज आर्य समाज मंदिर में बिहार प्रादेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के प्रधान सह बिहार विधान सभा में सत्तापक्ष के मुख्य सचेतक डॉ.संजीव चौरसिया का भव्य अभिनंदन किया गया। अभिनंदन समारोह में प्रधान रामेश्वर प्रसाद आर्य ने अंगवस्त्र व पुष्पगुच्छ से स्वागत किया। आर्यसमाज के पदाधिकारी, कार्यकर्त्ता, महिला समाज और आर्यवीर दल के लोगों ने भव्य स्वागत किया। प्रधान रामेश्वर प्रसाद आर्य ने भारत नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र में धर्मांतरण के मामला को प्रमुखता से सामने रखा। इस बावत रामेश्वर प्रसाद आर्य ने कहा कि सरकार को भारतीय सभ्यता और संस्कृति की रक्षा के निमित्त शिक्षा पद्धति में परिवर्तन की माँग किया। उन्होंने सत्तारुढ़ दल के मुख्य सचेतक डॉ.संजीव कुमार चौरसिया से माँग किया कि भारत को परम वैभव पर पहुँचाने के लिए गुरुकुल शिक्षा पद्धति को सुदृढ़ बनाने के लिए सरकार को प्रस्ताव देने को कहा है। अंत में डॉ.संजीव चौरसिया ने कहा कि आर्य समाज के प्रणेता स्वामी दयानन्द सरस्वती ने सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए 1875 में आर्य समाज की स्थापना किया। उन्होंने भारतीय सभ्यता और संस्कृति की रक्षा के लिए वेदो की ओर लौटो का सन्देश दिया। वर्तमान परिवेश में सरकार सनातन संस्कृति की रक्षा को कृतसंकल्पित है। इसके लिए भारतीय समाज को जागरुक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए सतर्क रहने की आवश्यकता है, आप सभी सजग और सतर्क रहे, हम सड़क से सदन तक आपकी आवाज बुलंद करते रहेंगे। जिला विशेषकर सीमावर्ती क्षेत्र है, पहले 236 चर्च से 600 से अधिक चर्च हो गए, इसलिए हमे सजग और सतर्क रहना है, आवश्यकता पड़ी तो हम प्राणों की आहुति देने को तैयार है। स्वतंत्रता आंदोलन में आर्यसमाज की भूमिका अति महत्वपूर्ण रही है। डॉ.चौरसिया ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में सरदार भगत सिंह, स्वामी श्रद्धानन्द, स्वामी विरजानन्द दण्डी, स्वामी दयानन्द सरस्वती,चंद्रशेखर आज़ाद जैसे अमर क्रन्तिकारी आर्यसमाज के कर्णधार रहे। उन्होंने आर्य समाज के अमूल्य योगदान को याद करते हुए, सशक्त रहकर भारतीय सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण में अपना योगदान करते रहे। उपर्युक्त कार्यक्रम में विजय प्रकाश आर्य, रामेश्वर प्रसाद आर्य(प्रधान) राजेश आर्य, अमरेश आर्य, सुधीर आर्य,सत्य प्रकाश आर्य, सोनू आर्य, विवेक आर्य,प्रशांत राज, किशोरी लाल जायसवाल, उमेश चौरसिया, ओमप्रकाश वर्णवाल, विराज चौरसिया, लालजी प्रसाद आर्य, पण्डित रामायण आर्य, संतोष वर्णवाल व अन्य शामिल रहे।












