Bettiah | कुंदन शुक्ला|
चनपटिया। सरकारी विद्यालयों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच चनपटिया प्रखंड की सिरिसिया पंचायत स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय चौधुर टोला की तस्वीर जमीनी हकीकत बयान कर रही है। विद्यालय में 146 बच्चे नामांकित हैं, लेकिन पढ़ाई के लिए मात्र तीन कमरे ही उपलब्ध हैं। ऐसे में अधिकांश बच्चों की कक्षाएं खुले आसमान के नीचे पेड़ की छांव में संचालित करनी पड़ रही हैं।
विद्यालय परिसर में शिक्षक ब्लैकबोर्ड लगाकर जमीन पर बैठे बच्चों को पढ़ाते नजर आ रहे हैं। सबसे दिलचस्प और विडंबनापूर्ण स्थिति यह है कि विद्यालय से सटे एक निजी भवन की दीवार पर ब्लैकबोर्ड बनाकर जुगाड़ के सहारे बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है। संसाधनों के अभाव में यह दीवार ही बच्चों की कक्षा बन गई है।
भीषण गर्मी के बावजूद बच्चे खुले में बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। बरसात और तेज धूप के दिनों में स्थिति और भी कठिन हो जाती है। बावजूद इसके शिक्षक किसी तरह बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो, इसके लिए लगातार प्रयासरत हैं।
विद्यालय के प्रधान शिक्षक रवि कुमार शुक्ला ने बताया कि विद्यालय में कमरों और भवन की भारी कमी है। अतिरिक्त भवन एवं कमरों के निर्माण को लेकर विभाग को कई बार पत्र भेजा गया है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद विद्यालय के शिक्षक पूरी जिम्मेदारी और समर्पण के साथ बच्चों को शिक्षा दे रहे हैं।
प्रधान शिक्षक ने कहा कि विद्यालय की समस्याओं से विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। मजबूरी में खुले मैदान, पेड़ की छांव और दीवार को ही कक्षा बनाकर बच्चों की पढ़ाई कराई जा रही है।
विद्यालय की यह तस्वीर ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की उस सच्चाई को सामने ला रही है, जहां एक ओर बच्चे कठिन परिस्थितियों में शिक्षा पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर शिक्षक सीमित संसाधनों में भी शिक्षा की लौ जलाए रखने में जुटे हुए हैं।












