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Sunday, July 19, 2026
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अधिकारियों की सुस्ती या रसूखदारों का दबाव ! नगर आयुक्त के आदेश को अंचल प्रशासन ने दिखाया ठेंगा!

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  • ​कागजों में सिमटी ‘निलहा नाला’ की मुक्ति: मंत्री-विधायक के निर्देश पर भी कुंडली मारकर बैठा अंचल प्रशासन
  • ​मोतिहारी नगर निगम का ‘सिस्टम’ फेल! आदेश के दो महीने बाद भी नाले की पैमाइश का अता-पता नहीं
  • नगर निगम का आदेश हवा में, दो महीने बाद भी ‘निलहा नाला’ पर नहीं शुरू हुई पैमाइश, ठंडे बस्ते में अतिक्रमण मुक्ति की कवायद

देश वाणी। दिलीप दुबे

मोतिहारी। जिला मुख्यालय मोतिहारी को जलजमाव की विभीषिका से मुक्ति दिलाने के सरकारी दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। मोतिहारी नगर निगम के नगर आयुक्त ने शहर के ऐतिहासिक और मुख्य निलहा नाला समेत अन्य प्रमुख नालों को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए जारी किया गया सख्त आदेश अब तक फाइलों में ही दफन है। आदेश जारी हुए लंबा समय बीत जाने के बाद भी पैमाइश (मापी) की प्रक्रिया शुरू नही हो सकी है, जिससे प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

विदित हो कि नगर आयुक्त ने 21 मई को ही सदर अंचलाधिकारी को पत्र लिखकर निर्देशित किया था कि मोतिहारी नगर निगम वार्ड संख्या 11 अंतर्गत पीडब्ल्यूडी ढाका रोड से शिवलोकपुरी मोहल्ला होते हुए भरौलिया नदी में मिलने वाले मुख्य निलहा नाला सहित नगर के अन्य मुख्य नालों का अतिक्रमण चिन्हित किया जाए। इस आदेश में अंचल अमीन को प्रतिनियुक्त करते हुए ससमय पैमाइश रिपोर्ट निगम कार्यालय को उपलब्ध कराने का सख्त निर्देश दिया गया था, लेकिन हफ्तों बीत जाने के बाद भी अंचल प्रशासन मौन साधे बैठा है।

अंग्रेज शासनकाल के पुराने सर्वे के नक्शे के अनुसार, शहर का मुख्य निलहा नाला छौतानी से भरौलिया, एनएच मठिया से खुशबू नगर, नकछेद टोला, कचहरी चौक से चीनी मिल पुराना क्वार्टर होते हुए तेघरा नाला तक जाता है, जो आगे चलकर धनौती नदी में विलीन होता है। इसके अलावा मेन रोड ज्ञानबाबू चौक और शिकारिया मिल सहित शहर के कई पुराने सर्वे नालों पर भू-माफियाओं और स्थानीय रसूखदारों द्वारा बड़े पैमाने पर अवैध पक्का निर्माण कर लिया गया है, जिससे जल निकासी पूरी तरह अवरुद्ध हो चुकी है।

गौरतलब है कि यह आदेश आम नहीं था। इस मामले में माननीय राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री, बिहार सरकार को स्थानीय विधायक प्रमोद कुमार द्वारा पत्र भेजा गया था। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल कुमार के आवेदन को संज्ञान में लेते हुए उच्च स्तर से नाले को अतिक्रमण मुक्त कराने की अनिवार्य आवश्यकता जताई गई थी। इसके बावजूद, निगम प्रशासन और अंचल कार्यालय के बीच की सुस्ती ने इस महत्वपूर्ण जनहित के कार्य को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।

आदेश की प्रतिलिपि कार्यालय अमीन कृष्ण अनिकेत एवं निरंजन कुमार सुमन को भी आवश्यक कार्रवाई हेतु तामीला कराई गई थी। लेकिन धरातल पर नतीजा सिफर रहने के कारण स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। इस मानसून सीजन में अभी तक बारिश नही हुई है, जिस दिन मूसलाधार बारिश हो जाये शहर के कई मोहल्ले जलमग्न हो जाएंगे। यदि समय रहते इन ऐतिहासिक नालों को पैमाइश कर अतिक्रमण मुक्त नहीं कराया गया, तो इस बार मोतिहारी को भीषण जलजमाव की त्रासदी से कोई नहीं बचा पाएगा। जनता यह सवाल पूछ रही है कि अंचल प्रशासन आखिर किसके दबाव में नगर आयुक्त के इस महत्वपूर्ण आदेश पर अब तक कुंडली मारकर बैठा है!

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