-ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण तथा किसानों की आय में में होगी वृद्धि
पीपराकोठी : बागवानी फसलों में कटाई के बाद लगभग 20–30 प्रतिशत तक उपज का नुकसान हो जाता है. ऐसे में फलों एवं सब्जियों का मूल्यवर्धन किसानों की आय बढ़ाने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने तथा कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रहा है. वर्तमान समय में उपभोक्ताओं के बीच सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण एवं सुविधाजनक खाद्य उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में फल प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन, महिला सशक्तिकरण तथा किसानों की आय में वृद्धि का सशक्त माध्यम बन सकता है. इसी उद्देश्य से पंडित दीन दयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय द्वारा फल प्रसंस्करण एवं मूल्यवर्धन को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक सुविधाएँ विकसित की गई हैं. महाविद्यालय ग्रामीण युवाओं, स्वयं सहायता समूहों तथा इच्छुक उद्यमियों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने पर ज़ोर दे रहा है, जिससे वे छोटे स्तर पर भी खाद्य प्रसंस्करण इकाइयाँ स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकें. महाविद्यालय के डीन डॉ. कुंदन किशोर ने बताया कि कुलपति महोदय के मार्गदर्शन में महाविद्यालय में एक फल प्रसंस्करण इकाई स्थापित की गई है, जहाँ छात्रों, को मूल्यवर्धित उत्पादों के निर्माण का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि यह पहल विद्यार्थियों के कौशल विकास के साथ-साथ स्वरोज़गार एवं उद्यमिता को भी नई दिशा प्रदान करेगी. महाविद्यालय के सहायक प्राध्यापक डॉ के प्रसाद ने बताया कि संस्थान वैज्ञानिक एवं स्वच्छ प्रसंस्करण तकनीकों के माध्यम से आम एवं अन्य फलों से अचार, जूस, स्क्वैश, डिहाइड्रेटेड चिप्स, फ्रूट लेदर, पाउथा,था अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दे रहा है. प्रशिक्षण के दौरान उत्पाद निर्माण के साथ-साथ गुणवत्ता नियंत्रण, स्वच्छता, आकर्षक पैकेजिंग, लेबलिंग, ब्रांडिंग तथा विपणन की भी जानकारी दी जाती है, ताकि प्रशिक्षार्थी सफल उद्यमी बन सकें. प्रशिक्षण में भाग लेने वाली छात्राओं स्नेहा और राम्या ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि आम का अचार तैयार करने के दौरान उन्हें यह अनुभव हुआ कि कच्चे आम का मूल्य प्रसंस्करण के बाद दोगुने से भी अधिक हो गया. उन्होंने कहा कि पहले जहाँ कच्चे फल सीमित आय प्रदान करता था , वहीं मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार कर बेहतर लाभ अर्जित किया जा सकता है. इससे उन्हें खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में स्वरोज़गार की नई संभावनाओं की जानकारी मिली. महाविद्यालय की यह पहल छात्रों, ग्रामीण युवाओं एवं महिला उद्यमियों का कौशल विकास को भी नई गति प्रदान करेगी.












