फोटो : वानिकी उत्पाद का प्रदर्शन करती पीडीडीयु वानिकी एवं उद्यानिकी महाविद्यालय की छात्राएं
माला सिन्हा
पीपराकोठी : एक समय था जब वानिकी को केवल वन विभाग की नौकरी तक सीमित समझा जाता था, किंतु आज यह धारणा पूरी तरह बदल चुकी है. आधुनिक वानिकी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ड्रोन प्रौद्योगिकी, भू-स्थानिक सूचना प्रणाली, रिमोट सेंसिंग, कार्बन लेखांकन, जैव विविधता मूल्यांकन तथा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का व्यापक उपयोग किया जा रहा है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यानिकी एवं वानिकी महाविद्यालय वानिकी शिक्षा, अनुसंधान एवं कौशल विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है. महाविद्यालय के डीन, डॉ. कुन्दन किशोर के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुलपति के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों को आधुनिक वैज्ञानिक ज्ञान, व्यावहारिक प्रशिक्षण, क्षेत्रीय अध्ययन, अनुसंधान अनुभव तथा रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान प्रदान किया जा रहा है ताकि उनका समग्र विकास और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित किया जा सके. डॉ. अभिषेक राज, सहायक प्राध्यापक ने बताया कि फॉरेस्ट्री ग्रेजुएट्स के पास फॉरेस्ट्री, एग्रो-फॉरेस्ट्री, फॉरेस्ट जेनेटिक्स और ट्री ब्रीडिंग, वाइल्डलाइफ साइंस, एनवायरनमेंटल साइंस, नेचुरल रिसोर्स मैनेजमेंट और जीआईएस और रिमोट सेंसिंग जैसे विषयों में आगे की पढ़ाई के बेहतरीन मौके हैं. पोस्ट-ग्रेजुएट पढ़ाई कराने वाले प्रमुख संस्थानों में फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट, वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, इंडियन काउंसिल ऑफ फॉरेस्ट्री रिसर्च एंड एजुकेशन, डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंट्रल एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी और बिरसा एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी शामिल हैं. इनमें एडमिशन आमतौर पर आइसीएआर, एआईईईए पीजी, सीयुईटी पीजी, एफआरआई एंट्रेंस एग्जाम या यूनिवर्सिटी के अपने टेस्ट के ज़रिए होता है, जिससे रिसर्च, एकेडेमिया, फॉरेस्ट सर्विस, एनवायरनमेंटल मैनेजमेंट और कंजर्वेशन के क्षेत्रों में करियर बनाने का रास्ता खुलता है. डॉ. हेमंत कुमार के अनुसार आने वाले दशकों में “ग्रीन जॉब्स” अर्थात हरित रोजगारों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, जिसमें वानिकी क्षेत्र की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी. कार्बन न्यूट्रैलिटी, नेट-जीरो उत्सर्जन, प्रकृति आधारित समाधान तथा हरित अर्थव्यवस्था की वैश्विक अवधारणाओं ने वानिकी को विकास के केंद्र में ला खड़ा किया है. यही कारण है कि आज वानिकी स्नातकों की मांग केवल वन विभागों तक सीमित न रहकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों, पर्यावरणीय परामर्श संस्थाओं, कार्बन क्रेडिट एजेंसियों, अनुसंधान संस्थानों तथा अंतरराष्ट्रीय संगठनों तक पहुँच चुकी है. आज आवश्यकता इस बात की है कि युवा पीढ़ी वानिकी के महत्व को समझे और इसे केवल रोजगार का माध्यम न मानकर पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक उत्तरदायित्व तथा राष्ट्र निर्माण के एक प्रभावी साधन के रूप में अपनाए. निस्संदेह, वानिकी ऐसा क्षेत्र है जो आर्थिक प्रगति और प्रकृति संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए एक हरित, समृद्ध और सतत भविष्य की दिशा में मार्ग प्रशस्त करता है.












