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Monday, January 12, 2026
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मकर संक्रांति: सिर्फ़ एक पर्व नहीं, हज़ारों वर्ष पूर्व भारतीय ऋषियों के विशाल खगोलीय ज्ञान का प्रतीक भी

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मकर संक्रांति को बिहार में खिचड़ी भी कहा जाता है। यह भारतीय संस्कृति, ऋतुओं, और स्वास्थ्य ज्ञान का अद्भुत मिश्रण है। यह दिन हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।

पटना से स्थानीय संपादक जितेन्द्र कुमार सिन्हा।

NASA की स्थापना 1958 मे हुई। तब उनके वाज्ञानिकों को सूर्य ग्रहण व चन्द्र ग्हण के बारे में पता चला। वह भी स्टेलाइट से देखकर। लिहाजा भारत के पंडित-पुजारी हजारों वर्षों से पोथी, पतरा व पंचाग देखकर 10 साल( बल्कि अनगिनत साल आगे) के ग्रहण की स्थिति बता सकते हैं।

लेखक जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना मेॉ स्थानीय संपादक हैं। फाइल फोटो : देश वाणी।

मकर संक्रांति जाड़े के मौसम में मनाई जाती है। इस समय ठंड अपने चरम पर होती है। ऋषि-मुनियों और विद्वानों ने ठंड से बचने और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए तिल, गुड़, दही, और चावल से बने खाद्य पदार्थों का प्रचलन शुरू किया। तिल और गुड़ शरीर को गर्म रखते हैं, जबकि दही पाचन को मजबूत बनाता है। इन खाद्य परंपराओं में भारतीय ज्ञान और दूरदर्शिता झलकती है।

सनातन परंपरा और खरमास का समापन:
मकर संक्रांति हिंदू सनातन परंपरा का एक प्रमुख पर्व है। इस दिन से खरमास समाप्त होता है, जिसका अर्थ है कि इस तिथि के बाद शुभ और मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन आदि की शुरुआत होती है। यह पर्व सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जिसे ‘सूर्य उत्तरायण’ कहा जाता है।

मकर संक्रांति: सिर्फ़ एक पर्व नहीं, खगोलीय ज्ञान का प्रतीक

खगोलीय बदलाव का पर्व

मकर संक्रांति सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का संकेत है, जो भारतीय खगोलशास्त्र की गहरी समझ को दर्शाता है।

हज़ारों वर्षों से जीवित परंपरा

यह पर्व भारतीय ऋषि-मुनियों के वैज्ञानिक दृष्टिकोण और सांस्कृतिक समृद्धि का जीता-जागता उदाहरण है।

सूर्य की उत्तरायण यात्रा

मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होता है, जो प्रकृति में सकारात्मक बदलाव का प्रतीक है।

हर क्षेत्र में विविधता के साथ उत्सव

देश के हर हिस्से में इसे अलग नाम और परंपराओं से मनाया जाता है, जैसे लोहड़ी, पोंगल, बिहू और खिचड़ी।

प्रकृति और विज्ञान का संगम

यह पर्व ऋतु परिवर्तन, कृषि उत्सव, और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।

मौसम और खाद्य परंपरा:
मकर संक्रांति जाड़े के मौसम में मनाई जाती है। इस समय ठंड अपने चरम पर होती है। ऋषि-मुनियों और विद्वानों ने ठंड से बचने और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए तिल, गुड़, दही, और चावल से बने खाद्य पदार्थों का प्रचलन शुरू किया। तिल और गुड़ शरीर को गर्म रखते हैं, जबकि दही पाचन को मजबूत बनाता है। इन खाद्य परंपराओं में भारतीय ज्ञान और दूरदर्शिता झलकती है।

पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व:
पौराणिक दृष्टि से, मकर संक्रांति को भगवान सूर्य और उनके पुत्र शनि के पुनर्मिलन का पर्व माना जाता है। वहीं, वैज्ञानिक आधार पर यह दिन सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर जाने का संकेत है। उत्तरायण में दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं, जिससे ऊर्जा और उत्साह का अनुभव होता है।

देशभर में मकर संक्रांति:
यह पर्व पूरे भारत में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है:

  • बिहार और उत्तर प्रदेश: इसे खिचड़ी पर्व कहा जाता है। तिल-गुड़ और खिचड़ी बनाने और दान करने की परंपरा है।
  • पश्चिम बंगाल: यहां ‘पौष संक्रांति’ के रूप में तिल और चावल से बनी ‘पिठे’ मिठाई का महत्व है।
  • महाराष्ट्र: यहां तिल-गुड़ के साथ महिलाओं द्वारा सौभाग्य के प्रतीक रूप में हल्दी-कुमकुम समारोह होता है।
  • गुजरात और राजस्थान: पतंगबाजी इस पर्व की प्रमुख परंपरा है।
  • पंजाब: इसे ‘माघी’ कहा जाता है और लोहड़ी के अगले दिन मनाया जाता है।
  • तमिलनाडु: ‘पोंगल’ के नाम से प्रसिद्ध यह पर्व फसलों की उपज का उत्सव है।
  • आंध्र प्रदेश और कर्नाटक: इसे ‘संक्रांति’ के नाम से मनाते हैं और गायों को सजाकर उनका पूजन किया जाता है।

सार:
मकर संक्रांति सिर्फ एक पर्व नहीं है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, ऋतुओं, और स्वास्थ्य ज्ञान का अद्भुत मिश्रण है। यह दिन हमें प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर जीवन जीने की प्रेरणा देता है।


मकर संक्रांति: सूर्यदेव की आराधना का महापर्व

मकर राशि में सूर्य का प्रवेश

ग्रहों के राजा सूर्य देव जब मकर राशि में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। यह दिन सूर्य के उत्तरायण होने का प्रतीक है।

भारत का सांस्कृतिक महापर्व

मकर संक्रांति पूरे भारत में अलग-अलग नामों और परंपराओं से मनाई जाती है। पंजाब में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, असम में बिहू, और बिहार-उत्तर प्रदेश में खिचड़ी के रूप में यह पर्व प्रसिद्ध है।

गंगा स्नान और दान का महत्व

इस दिन गंगा स्नान करने और तिल, गुड़, चावल, उड़द और सर्दियों के वस्त्र दान करने से मोक्ष और पुण्य की प्राप्ति होती है।

खगोलीय और वैज्ञानिक महत्व

मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण होता है, दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं। यह समय फसल कटाई और नए कृषि सत्र की शुरुआत का प्रतीक है।

खान-पान की परंपरा

इस पर्व पर तिल और गुड़ से बनी सामग्रियों का सेवन होता है। यह शरीर को ऊर्जावान और स्वस्थ रखने में सहायक मानी जाती हैं।

सामाजिक और आध्यात्मिक संदेश

मकर संक्रांति न केवल सांस्कृतिक बल्कि सामाजिक एकता, प्रकृति के साथ सामंजस्य और आध्यात्मिक शांति का संदेश भी देती है।

Makar Sankranti: Not Just a Festival, but a Symbol of Astronomical Knowledge

A Festival of Celestial Transition

Makar Sankranti marks the Sun’s transition from Sagittarius to Capricorn, reflecting the profound understanding of astronomy by ancient Indian sages.

A Tradition Alive for Thousands of Years

This festival stands as a testament to the scientific perspective and cultural richness preserved by Indian sages for millennia.

The Sun’s Journey Towards the North

Makar Sankranti signifies the Sun’s movement towards the northern hemisphere, symbolizing positive changes in nature.

Celebrations Across Regions

This festival is celebrated across India with unique names and traditions, such as Lohri, Pongal, Bihu, and Khichdi.

A Confluence of Nature and Science

The festival highlights the transition of seasons, agricultural festivities, and the message of social harmony.

NASA (National Aeronautics and Space Administration) की स्थापना 29 जुलाई 1958 को हुई थी। यह अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट डी. आइज़नहावर द्वारा नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एक्ट पर हस्ताक्षर के बाद स्थापित किया गया।

NASA ने अपना कार्य 1 अक्टूबर 1958 से शुरू किया। यह संगठन मुख्य रूप से अंतरिक्ष अनुसंधान, विज्ञान और तकनीकी विकास में अग्रणी भूमिका निभाता है।

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