-आधे-अधूरे नाला निर्माण और ड्रेनेज सिस्टम ने बढ़ाई शहरवासियों की परेशानी
देश वाणी। दिलीप दुबे
मोतिहारी। जिले में शुक्रवार की सुबह तेज हवा के साथ हुई झमाझम बारिश ने जहां एक तरफ उमस भरी गर्मी से राहत दिलाई, वहीं दूसरी तरफ नगर निगम के दावों की पोल खोलकर रख दी। शहर के नालों की उड़ाही का कार्य पूरा न होने के कारण पहली ही तेज बारिश में नालियां उफना गईं। इसके चलते शहर के विभिन्न मोहल्लों, मुख्य सड़कों और गलियों में भीषण जल-जमाव की स्थिति पैदा हो गई है, जिससे आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
बारिश के बाद शहर के अलग-अलग इलाकों में स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। छतौनी स्थित मुख्य बस स्टैंड परिसर जल-जमाव के कारण किसी तालाब जैसा नजर आ रहा है। यात्रियों और वाहन चालकों को भारी फजीहत झेलनी पड़ रही है। वहीं बाजार समिती रोड़ में मुख्य मार्ग पर सड़क के बीचों-बीच नालियों का कचरायुक्त गंदा पानी बह रहा है, जिससे राहगीरों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। राजेंद्र नगर मोहल्ले व जमला रोड में सड़कों पर करीब डेढ़ फीट तक पानी जमा हो गया है, जिससे लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं। ईदगाह रोड व चांदमारी इलाकों में भी भीषण जल-जमाव देखा गया। चांदमारी स्थित मुख्य नाले की सफाई न होने का खामियाजा पूरे इलाके को भुगतना पड़ रहा है। शांतिपुरी मोहल्ले की गलियों में नाला निर्माण का कार्य अधर में लटका है। खुदाई और बारिश के पानी के मिल जाने से पूरी गली दलदल और जल-जमाव की चपेट में है। शहर को जल-जमाव से मुक्ति दिलाने के नाम पर नगर निगम हर साल करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाता है, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस है। स्थानीय लोगों के अनुसार, निगम द्वारा बनाए गए कई मुख्य नाले अंदर-अंदर ही क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। लाखों-करोड़ों खर्च होने के बाद भी ये नाले अब पूरी तरह जवाब दे रहे हैं।
शहर वासियों का कहना है कि नगर निगम ने मॉनसून से पहले शहर के छोटे और बड़े नालों की उड़ाही का कार्य आधा-अधूरा ही छोड़ दिया। छोटे नालों को बड़े नालों से सही तरीके से नहीं जोड़ा गया है, जिससे पानी का बहाव रुक जाता है। पिछले दो दशकों में शहर की आबादी तो बढ़ी, लेकिन उस अनुपात में जलनिकासी के लिए नए नालों का निर्माण नहीं हो सका। नतीजा पहली ही बारिश ने नगर निगम के प्री-मॉनसून तैयारियों के दावों की हवा निकाल दी है। अगर आने वाले दिनों में लगातार बारिश होती है, तो मोतिहारी वासियों के लिए यह बरसात किसी आफत से कम नहीं होने वाली। प्रशासन को जल्द से जल्द युद्ध स्तर पर नालों की सफाई और ड्रेनेज सिस्टम को दुरुस्त करना होगा।












