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Thursday, January 22, 2026
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क्या है DeepSeek, जिसे दुनिया भर के मीडिया स्रोतों ने हौवा बना दिया है, क्या चीन अमेरिका को पीछे छोड़ देगा?

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DeepSeek की स्थापना चीन के युवा शोधकर्ताओं के एक समूह ने की थी, जिसे वैज्ञानिक जिज्ञासा ने प्रेरित किया। इस कंपनी के संस्थापक लीआंग (Liang) हैं, जिन्होंने चीन की प्रमुख यूनिवर्सिटियों के पीएचडी छात्रों को टीम में शामिल किया। DeepSeek अन्य चीनी टेक कंपनियों जैसे Baidu, Alibaba, और ByteDance से स्वतंत्र रूप से काम कर रही है।

DeepSeek की सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी सरकार द्वारा लगाए गए एक्सपोर्ट कंट्रोल थे, जिससे उन्हें NVIDIA के एडवांस्ड चिप्स H100 तक पहुंचने में कठिनाई हुई। लेकिन इस बाधा को पार करने के लिए, कंपनी ने अपने AI मॉडल्स को अधिक कुशल बनाने पर ध्यान केंद्रित किया, जिससे वे कम कंप्यूटिंग संसाधनों में भी उच्च गुणवत्ता वाले परिणाम देने में सक्षम हुए।

DeepSeek की हालिया प्रगति यह दिखाती है कि सीमित संसाधनों में भी AI मॉडल विकसित किए जा सकते हैं, जिससे अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव पर सवाल उठने लगे हैं। यह तकनीकी नवाचार चीन के AI अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में मदद कर सकता है।

क्या चीन DeepSeek के जरिए अमेरिका को AI में पीछे छोड़ देगा? हकीकत क्या है?

DeepSeek: चीन की AI दुनिया में बड़ी छलांग?
चीन की एक छोटी सी स्टार्टअप DeepSeek ने अचानक AI जगत में सनसनी फैला दी है। कंपनी का नया AI मॉडल DeepSeek-R1, OpenAI के GPT-4o के बराबर माना जा रहा है, लेकिन इसे विकसित करने की लागत अमेरिकी मॉडलों की तुलना में 90-95% कम है। DeepSeek ने कम संसाधनों में NVIDIA के प्रतिबंधित चिप्स के बिना यह उपलब्धि हासिल की, जिससे यह बहस तेज हो गई है कि क्या अमेरिका द्वारा चीन पर लगाए गए तकनीकी प्रतिबंध वास्तव में कारगर हैं या उल्टा अमेरिका को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं।

अमेरिकी टेक कंपनियों पर असर
DeepSeek की सफलता के बाद NVIDIA के शेयरों में भारी गिरावट आई, जिससे कंपनी के बाजार मूल्य में 600 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी हो गई। इसके अलावा, अमेरिका और यूरोप में यह चिंता बढ़ गई है कि चीन की कंपनियां सस्ते और प्रभावी तरीकों से अत्याधुनिक AI विकसित कर सकती हैं।

चीन का AI में उभार: प्रतिबंधों के बावजूद सफलता
अमेरिका ने AI चिप्स की बिक्री पर कड़े प्रतिबंध लगाकर चीन को AI विकास में पीछे धकेलने की कोशिश की थी। लेकिन इसके बजाय, चीन की कंपनियों ने वैकल्पिक रास्ते खोज लिए। DeepSeek के मामले में भी ऐसा ही हुआ – यह मॉडल अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद विकसित किया गया और इसकी क्षमताओं ने दुनिया को चौंका दिया।

क्या अमेरिका पिछड़ रहा है?
हालांकि DeepSeek ने सस्ता और कुशल मॉडल तैयार किया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका अभी भी बड़े पैमाने पर AI रिसर्च में आगे है। DeepSeek की तकनीकी सफलता भले ही बड़ी हो, लेकिन अभी यह पूरी तरह से OpenAI, Google और Meta जैसी कंपनियों के समकक्ष नहीं है। लेकिन यह निश्चित रूप से संकेत देता है कि चीन तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है

क्या चीन पर भरोसा किया जा सकता है?
चीन की कंपनियों पर जासूसी और डेटा चोरी के आरोप पहले से लगते रहे हैं। यही कारण है कि भारत ने TikTok, Huawei और अन्य चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था। अमेरिका और यूरोप भी सुरक्षा कारणों से Huawei को 5G नेटवर्क से बाहर कर चुके हैं। ऐसे में DeepSeek जैसी कंपनियों पर भी संदेह उठना स्वाभाविक है कि क्या वे केवल तकनीकी नवाचार कर रही हैं, या इनके पीछे कोई सरकारी एजेंडा भी है?

भारत को क्या फायदा हो सकता है?
चीन में सस्ती लेबर और सरकारी सब्सिडी की वजह से Apple, Microsoft, और Tesla जैसी कंपनियों ने वहां अपने मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगाए थे। लेकिन अब बहुत सी कंपनियां चीन से बाहर निकल रही हैं और भारत का रुख कर रही हैं
भारत में आ रही कंपनियों में शामिल हैं:

  • Apple: iPhone निर्माण के लिए भारत में प्लांट लगा रहा है।
  • Samsung: पहले ही भारत में बड़े पैमाने पर मोबाइल उत्पादन कर रहा है।
  • Foxconn & Pegatron: Apple के सप्लायर भारत में निवेश बढ़ा रहे हैं।

निष्कर्ष: DeepSeek को लेकर कितना हंगामा जायज?
DeepSeek की सफलता चीन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन यह मान लेना जल्दबाजी होगी कि चीन ने अमेरिका को पूरी तरह पीछे छोड़ दिया है। अमेरिका अभी भी AI चिप्स, सुपर कंप्यूटिंग, और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट में आगे है, लेकिन चीन तेजी से विकल्प विकसित कर रहा है। वहीं, भारत को इस वैश्विक प्रतिस्पर्धा से फायदा मिल सकता है क्योंकि कई पश्चिमी कंपनियां चीन छोड़कर भारत में निवेश बढ़ा रही हैं

इस मामले में आगे की स्थिति AI तकनीक, जियो-पॉलिटिक्स और अमेरिका की नीतियों पर निर्भर करेगी। क्या DeepSeek वाकई AI की दुनिया में नया गेम चेंजर साबित होगा या यह सिर्फ एक मीडिया हाइप है? यह आने वाले समय में साफ होगा।

What is DeepSeek, and Is China Really Surpassing the U.S. in AI?

What is DeepSeek?

DeepSeek is a Chinese AI company that has gained global media attention for developing AI models comparable to those of OpenAI. Founded by researcher Liang, DeepSeek consists of young PhD graduates from top Chinese universities like Peking University and Tsinghua University. Unlike other Chinese AI firms, it does not rely on funding from tech giants like Baidu, Alibaba, or ByteDance.

Is China Overtaking the U.S. in AI?

Many media reports claim that China is rapidly closing the AI gap with the U.S., but the reality is more complex. While China has made impressive progress in AI research, including DeepSeek’s innovations, it still faces challenges in hardware and global trust.

Key factors to consider:

  1. Chip Restrictions: The U.S. has imposed strict sanctions limiting China’s access to cutting-edge semiconductors. While DeepSeek has developed innovative techniques to bypass these limitations, it still lacks access to the most powerful AI chips
  2. Global Trust Issues: Many Western countries remain skeptical about Chinese AI companies due to concerns over data security and surveillance. This was evident when the U.S. and India banned TikTok, citing national security risks
  3. Media Influence: Some analysts believe China is using global media to amplify its AI advancements, making it seem like it is surpassing the U.S. However, the U.S. still leads in foundational AI research, semiconductor design, and enterprise AI adoption

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