शिलांग। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (NIFT) शिलांग द्वारा आयोजित दो दिवसीय “क्राफ्ट बाजार 2026” का समापन समारोह उत्साह और गरिमा के साथ संपन्न हुआ। इस आयोजन में विभिन्न क्षेत्रों से आए कारीगरों ने अपनी पारंपरिक कला और हस्तशिल्प का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य कारीगरों को मंच प्रदान करना, उनकी कला को प्रोत्साहित करना तथा पारंपरिक शिल्प को आधुनिक बाजार से जोड़ना था।

इस अवसर पर कार्यक्रम में कई विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि श्रीमती डैफिरालिन खारजाना, प्रबंध निदेशक, मेघालय हैंडलूम एंड हैंडीक्राफ्ट्स डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (MHHDC) थीं। उनके साथ श्रीमती रीमा सोनार, सहायक निदेशक, हैंडिक्राफ्ट्स सर्विस सेंटर भी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं।
इसके अलावा निफ्ट शिलांग की संयुक्त निदेशक श्रीमती रिमी दास भी कार्यक्रम में मौजूद थीं। साथ ही इस अवसर पर श्रीमती शेरिंग डोलकर (CAC) और श्री क्सनकुपर खोंगसित (CIC) भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत संबोधन से हुई, जिसमें बताया गया कि क्राफ्ट बाजार का पहला दिन बारिश के बावजूद सफलतापूर्वक आयोजित किया गया, जहां कारीगरों ने अपने हस्तनिर्मित उत्पादों और पारंपरिक शिल्प का प्रदर्शन किया।

इसके बाद हेरिटेज वॉक का आयोजन किया गया, जिसमें निफ्ट शिलांग के छात्रों ने पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध वस्त्र परंपरा, संस्कृति और विविधता को प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि आज के फास्ट फैशन के दौर में निफ्ट और कारीगर मिलकर सस्टेनेबिलिटी और पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने का कार्य कर रहे हैं।
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि देशभर में निफ्ट के 20 कैंपस हैं, जो डिजाइन शिक्षा के साथ-साथ पारंपरिक कला और कारीगरों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इनमें निफ्ट शिलांग पूर्वोत्तर भारत का एकमात्र कैंपस है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध वस्त्र परंपरा, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित और आगे बढ़ाने का कार्य कर रहा है।
समारोह के दौरान आर्टिजन अवेयरनेस वर्कशॉप और क्राफ्ट बाजार 2026 में भाग लेने वाले कारीगरों को प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही रील मेकिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।
इस दो दिवसीय कार्यक्रम का संचालन अनुष्का उनियाल और अभिजीत परिहार द्वारा किया गया, जिन्होंने पूरे आयोजन को सहज और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। यह आयोजन कारीगरों की कला, संस्कृति और रचनात्मकता का एक सुंदर उत्सव बनकर सामने आया।












