Bettiah | भूपेश कुमार |
गौनाहा। शिवालिक रेंज की पर्वत शृंखला और भारत-नेपाल सीमा पर बसे मैनाटांड़ प्रखंड से लेकर वाल्मीकि नगर तक के थारू जनजाति के किसानों की दास्तां बेहद दर्दनाक है। जहाँ एक तरफ दुनिया चैन की नींद सोती है, वहीं थारू बहुल क्षेत्रों के किसान घास-फूस और बांस से बने 20 फीट ऊंचे मचानों पर रात जगा कर अपनी फसलों की रखवाली करते हैं। यदि वे ऐसा न करें, तो जंगली जानवर उनकी मेहनत को पूरी तरह बर्बाद कर देंगे, जिससे परिवारों के सामने भुखमरी की स्थिति पैदा हो जाएगी।
पश्चिमी चम्पारण जिले के चार प्रखंडों—मैनाटांड़, गौनाहा, रामनगर और बगहा में जंगल किनारे बसे गाँवों के खेतों में दर्जनों मचान दिख जाएंगे। किसान उमेश महतो, हरि शंकर महतो, रमेश महतो और जग जीवन दहईत सहित अन्य ने बताया कि सुअर, हिरण, सांभर और नीलगाय रात भर में फसल सफाचट कर जाते हैं।
कड़ी मशक्कत और रात भर जागने के बावजूद ये किसान केवल 60 प्रतिशत फसल ही बचा पाते हैं। किसानों ने शिकायत की कि मुआवजे के लिए वन विभाग को आवेदन देने पर काफी भाग-दौड़ करनी पड़ती है और बदले में नाम मात्र की राशि मिलती है। उधर, गोवर्धना रेंज के रेंजर सुनील कुमार पाठक ने कहा कि आवेदन मिलने पर विभाग जांच के बाद उचित मुआवजा दिलाने का हर संभव प्रयास करता है।
Bettiah | Bagaha| Mainatad |While the world sleeps peacefully, farmers in Tharuhat spend the night on 20-foot-high Bamboo Scaffolding (Bamboo Machan) , struggling to protect their crops from wild animals.












