SHABD,Lucknow, April 1,
नये सत्र से प्रार्थना सभा में अनिवार्य हुई समाचार पत्रों की मुख्य खबरों की रीडिंग।
कठिन शब्दों का ज्ञान, संपादकीय पर चर्चा और स्क्रैपबुक निर्माण से बढ़ेगी तार्किक क्षमता।
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के माध्यमिक और बेसिक स्कूलों में आज से शुरू हो रहे नए शैक्षिक सत्र के साथ बच्चों के ‘स्क्रीन टाइम’ को कम करने के लिए एक अभिनव पहल की शुरुआत की गई है। इस योजना के तहत छात्रों को डिजिटल माध्यमों और मोबाइल की लत से दूर रखकर समाचार पत्रों तथा पुस्तकों के प्रति जागरूक किया जाएगा। विभागीय निर्देशों के अनुसार, अब प्रतिदिन प्रार्थना सभा में बच्चों को अखबारों की मुख्य खबरें पढ़कर सुनाई जाएंगी, साथ ही कठिन शब्दों के सही उच्चारण और उनके अर्थ भी समझाए जाएंगे।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य बच्चों के भाषाई, तार्किक और बौद्धिक विकास को सुदृढ़ बनाना है। छात्रों को महत्वपूर्ण समसामयिक विषयों पर संपादकीय लेखन, समूह चर्चा और सामाजिक विकास से जुड़ी खबरों पर विचार-विमर्श के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। विशेष रूप से कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों को विज्ञान, पर्यावरण और खेल जगत की खबरों की कतरनों का उपयोग कर ‘स्क्रैपबुक’ तैयार करने का कार्य सौंपा गया है। इसके अतिरिक्त, बच्चों की मानसिक क्षमता बढ़ाने के लिए सप्ताह में एक दिन सुडोकू, शब्द पहेली और क्विज प्रतियोगिताओं का आयोजन अनिवार्य किया गया है।
अमरोहा की जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. मोनिका ने बताया कि स्कूलों में छात्रों के मोबाइल लाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लागू रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कदम से बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित होगी और वे सूचनाओं के प्रति अधिक विश्लेषणात्मक बनेंगे। स्थानीय शिक्षाविदों का मानना है कि इस सक्रियता से बच्चों की एकाग्रता में वृद्धि होगी और डिजिटल निर्भरता में निश्चित रूप से कमी आएगी। प्रशासन ने सभी प्रधानाध्यापकों को इस नई शिक्षण पद्धति को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया है।
Lucknow | Children’s ‘screen time’ will be reduced in schools, now students will increase their knowledge by reading newspapers.












