वेबिनार के मुख्य वक्ता महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बिहार के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के प्रोफेसर साकेत रमण ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने दो शताब्दियों की अपनी यात्रा में अनेक उतार-चढ़ाव देखे हैं, किंतु उसकी मूल शक्ति समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व रही है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता की गरिमा और विश्वसनीयता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए पत्रकारों को राष्ट्रहित से जुड़े विषयों को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने बल देते हुए कहा कि बिना प्रमाणीकरण और तथ्यात्मक पुष्टि के किसी भी समाचार का प्रकाशन पत्रकारिता की साख को प्रभावित करता है। पत्रकारों को सत्य, निष्पक्षता और सामाजिक उत्तरदायित्व के आदर्श स्थापित करते हुए एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ कार्य करना चाहिए।
वरिष्ठ पत्रकार चंदन शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता के प्रभाव और विस्तार को बढ़ाने के लिए पत्रकारों में भाषा के सौंदर्यबोध, संवेदनशीलता और अभिव्यक्ति की गहराई होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल सूचना देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की चेतना को दिशा देने वाला सशक्त उपकरण है। इसलिए पत्रकारों को भाषा और प्रस्तुति की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पांडे ने कहा कि पत्रकार की सबसे बड़ी पूंजी उसकी विश्वसनीयता होती है। यदि पत्रकार अपनी निष्पक्षता और विश्वास को बनाए रखता है तो उसकी प्रतिष्ठा और पत्रकारिता दोनों निरंतर प्रगति करती हैं। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के इस दौर में भी सत्यनिष्ठ पत्रकारिता की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है।
संघ के संस्थापक शाहनवाज़ हसन ने कहा कि वर्तमान समय पत्रकारों के लिए चुनौतियों के साथ-साथ अनेक अवसर भी लेकर आया है। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने अभिव्यक्ति के नए द्वार खोले हैं। उन्होंने पत्रकारों से आह्वान किया कि वे परिस्थितियों से घबराने के बजाय नई तकनीकों को अपनाते हुए चुनौतियों का साहसपूर्वक सामना करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि हिंदी पत्रकारिता का भविष्य अत्यंत उज्ज्वल और स्वर्णिम है।
वरिष्ठ पत्रकार संजय मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि पत्रकारिता के समक्ष उपस्थित चुनौतियों को लेकर निराश होने की आवश्यकता नहीं है। सकारात्मक दृष्टिकोण, सतत अध्ययन और पेशेवर दक्षता के माध्यम से पत्रकार समाज को नई दिशा दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब पत्रकारिता सकारात्मकता और सामाजिक सरोकारों के साथ आगे बढ़ेगी, तब समाज भी प्रगति और विकास के मार्ग पर अग्रसर होगा।
कार्यक्रम का संचालन भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. नवीन आनंद जोशी ने किया। उन्होंने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गौरवमयी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज आवश्यकता इस बात की है कि पत्रकारिता अपनी मूल संवेदनाओं, नैतिक मूल्यों और जनपक्षधरता को बनाए रखते हुए डिजिटल युग की नई चुनौतियों का सामना करे।
वेबिनार में देश के विभिन्न राज्यों से पत्रकारों, मीडिया विद्यार्थियों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। सभी वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता के उज्ज्वल भविष्य और उसकी सामाजिक भूमिका को और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्षों की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने तथा सत्य, निष्पक्षता और जनहित के मूल्यों को संरक्षित रखने का संकल्प व्यक्त किया।













