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Tuesday, June 9, 2026
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राज्यसभा में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव की तैयारी

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पटना से स्थानीय संपादक जितेन्द्र कुमार सिन्हा।

देश की प्रमुख विपक्षी पार्टियां, जिनमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, राजद, सपा, सीपीआइ (एम) और सीपीआइ शामिल हैं, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के विरुद्ध राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव का नोटिस देने की तैयारी में जुटी हैं।


महाभियोग प्रक्रिया का संवैधानिक प्रावधान

संविधान के अनुच्छेद 124 (4) और 124 (5) के अनुसार, किसी न्यायाधीश के विरुद्ध महाभियोग की प्रक्रिया न्यायाधीश (जांच) अधिनियम, 1968 के तहत चलती है। लोकसभा में प्रस्ताव पेश करने के लिए 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं। प्रस्ताव की स्वीकृति के बाद सदन का पीठासीन अधिकारी इसे स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है।


न्यायिक समिति और जांच प्रक्रिया

नोटिस स्वीकार होने पर तीन सदस्यीय न्यायिक समिति यह तय करती है कि मामला महाभियोग के योग्य है या नहीं। समिति में सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालय के एक-एक न्यायाधीश शामिल होते हैं।


न्यायाधीश के बयान पर विवाद

सूत्रों के अनुसार, विश्व हिंदू परिषद के एक कार्यक्रम में दिए गए विवादास्पद बयान के आधार पर विपक्ष महाभियोग की मांग कर रहा है। यह मामला 10 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट की नजर में आया, जब वीडियो वायरल होने पर सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय से रिपोर्ट मांगी।

मंगलवार को न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाले कॉलेजियम के समक्ष अपना पक्ष रखा। कॉलेजियम, निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार, उच्च न्यायालय से रिपोर्ट मांगता है और न्यायाधीश को अपनी बात रखने का अवसर देता है।


विपक्ष और अन्य संगठनों की प्रतिक्रिया

विपक्षी दलों ने न्यायाधीश के बयान को “घृणास्पद भाषण” करार दिया है। प्रशांत भूषण ने प्रधान न्यायाधीश को पत्र लिखकर “आंतरिक जांच” की मांग की है। सीपीआइ (एम) नेता वृंदा करात ने इसे न्यायिक शपथ का उल्लंघन बताया। ‘बार एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ ने भी इस बयान की निंदा की है।


महाभियोग प्रक्रिया के प्रभाव और इतिहास

महाभियोग प्रस्ताव पास होने के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है। प्रस्ताव पास होने के बाद राष्ट्रपति न्यायाधीश को पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करते हैं।

1993 में न्यायाधीश वी. रामास्वामी और 2011 में न्यायाधीश सौमित्र सेन के विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन दोनों मामलों में परिणाम अलग-अलग रहे।


वर्तमान स्थिति

महाभियोग प्रस्ताव पर अब तक 36 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं, जिनमें कांग्रेस के दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश, विवेक तन्खा, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले, सागरिका घोष, राजद के मनोज कुमार झा, सपा के जावेद अली खान, सीपीआइ (एम) के जॉन ब्रिटास, और सीपीआइ के संदोष कुमार शामिल हैं।

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