पूर्वी चम्पारण की पुलिस व SSB की संयुक्त कार्रवाई में बड़ी सफलता-
रक्सौल | अनिल कुमार|
भारत-नेपाल सीमा के सीमावर्ती शहर रक्सौल में पुलिस और एसएसबी 47वीं बटालियन की संयुक्त कार्रवाई में दो फर्जी मार्केटिंग कंपनियों के ठिकानों पर छापेमारी कर करीब 400 बच्चों को मुक्त कराया गया। इनमें नाबालिग और बालिग युवक शामिल थे। इस ऑपरेशन का नेतृत्व एसडीपीओ धीरेन्द्र कुमार और एसएसबी के डिप्टी कमांडेंट दीपक कृष्णा ने किया। छापेमारी के दौरान बड़ी संख्या में सशस्त्र पुरुष एवं महिला बल तैनात थे।
फर्जी कंपनियों का जालसाजी नेटवर्क
इन कंपनियों में बिन मेकर और डीबीआरओ दिनकर एसोसिएट्स शामिल थीं, जो दवा कंपनी और नेटवर्किंग के नाम पर वर्षों से किशोरों और युवाओं को नौकरी का लालच देकर ठग रही थीं। इनका नेटवर्क बिहार, उत्तर प्रदेश, नेपाल, उड़ीसा समेत कई राज्यों तक फैला था। रोजाना 100 से 500 बच्चों को फॉर्मल ड्रेस में शहर के विभिन्न इलाकों में घूमते देखा जाता था, जिनमें नागा रोड, कोइरिया टोला, ब्लॉक रोड, सैनिक रोड, कौड़ीहार, मौजे आदि प्रमुख स्थान थे।
गुप्त जांच के बाद बड़ी कार्रवाई
एसएसबी की मानव तस्करी रोधी इकाई व प्रयास की आरती कुमारी को जब इस जालसाजी की सूचना मिली, तो गुप्त जांच के बाद छापेमारी की योजना बनाई गयी। पुलिस और एसएसबी की संयुक्त टीम ने कई ठिकानों पर एक साथ छापा मारा, जिसमें चार लड़कियों समेत करीब 400 बच्चे मुक्त कराए गए। हालाँकि, अब तक सिर्फ चार से पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
कैसे फंसाए जाते थे बच्चे?
फर्जी कंपनियां युवकों को नौकरी और प्रशिक्षण के नाम पर ठग रही थीं। भोले-भाले किशोरों और युवकों को यह झांसा दिया जाता था कि उन्हें अच्छी सैलरी पर नौकरी मिलेगी। नौकरी के नाम पर उनसे पैसे लिए जाते थे और दवा पैकिंग जैसे काम करवाए जाते थे। एक बार इस जाल में फंसने के बाद ये बच्चे पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कट जाते थे और कोई शिकायत नहीं कर पाते थे।
प्रशासन का बयान
एसपी स्वर्ण प्रभात ने कहा:
“नेपाल, उत्तर प्रदेश और बिहार के अन्य जिलों से बच्चों को नौकरी देने के बहाने बुलाया जाता था और उन्हें बंधक बनाकर पैसे वसूले जाते थे। सूचना मिलने के बाद रक्सौल पुलिस और एसएसबी ने संयुक्त कार्रवाई कर 400 बच्चों को मुक्त कराया है। इसमें कई नाबालिग भी शामिल हैं।“
एसडीपीओ धीरेन्द्र कुमार ने कहा:
“फर्जी कंपनियां दवा कंपनी और नेटवर्किंग के नाम पर बच्चों को फंसा रही थीं। हमें लगातार इस तरह की धोखाधड़ी और जालसाजी की शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद कार्रवाई कर 400 बच्चों को मुक्त कराया गया। दोषियों की पहचान कर आगे विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।“
एसएसबी डिप्टी कमांडेंट दीपक कृष्णा ने कहा:
“हमें सूचना मिली थी कि नौकरी के नाम पर बच्चों से पैसे लेकर उन्हें ट्रेनिंग दी जा रही थी। कई राज्यों के युवक इस फर्जी नेटवर्क में फंस रहे थे। हमने छापेमारी कर इन बच्चों को बचाया, जिनमें से कई से दवा पैकिंग का काम कराया जा रहा था।“
400 परिवारों को मिली राहत
इस बड़ी कार्रवाई से 400 परिवारों को राहत मिली, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि इतने वर्षों तक ये कंपनियां कैसे बिना किसी डर के चल रही थीं? प्रशासन की तत्परता से इन बच्चों को सुरक्षित निकाला गया, लेकिन जरूरी है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।
छापेमारी में शामिल अधिकारी
इस ऑपरेशन में डीएसपी धीरेन्द्र कुमार, एसएसबी 47वीं बटालियन के असिस्टेंट कमांडेंट नेहा सिंह, डिप्टी कमांडेंट दीपक कुमार, एसएसबी एसी रजक मिश्रा, सीओ शेखर राज, मजिस्ट्रेट, पुलिस इंस्पेक्टर राजीव नंदन सिन्हा, सब इंस्पेक्टर एकता कुमारी, नेहा कुमारी और अनीता कुमारी के साथ ‘प्रयास संस्था’ की आरती कुमारी शामिल थीं।
📷 फोटो: रक्सौल में फर्जी मार्केटिंग कंपनियों पर छापेमारी, 400 बच्चे मुक्त