जितेन्द्र कुमार सिन्हा, पटना | 31 मार्च, 2025
नवरात्र – देवी दुर्गा के नौ शक्तियों का पर्व
नवरात्र को मां दुर्गा की नौ शक्तियों के मिलन का पर्व कहा जाता है। यह पर्व प्रतिपदा से नवमी तक चलता है और हर दिन मां दुर्गा के एक विशेष रूप की पूजा की जाती है। नवरात्र के पहले तीन दिन मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी और चंद्रघंटा की उपासना होती है।

नवरात्र के तीसरे दिन – मां चंद्रघंटा की पूजा
नवरात्र के तीसरे दिन भक्त मां चंद्रघंटा की उपासना करते हैं। मां अपने मस्तक पर अर्धचंद्र धारण किए हुए होती हैं, जो घंटी के आकार में दिखता है, इसी कारण इन्हें “चंद्रघंटा” कहा जाता है। मां चंद्रघंटा शक्ति और साहस का प्रतीक हैं।
मां चंद्रघंटा के तीन नेत्र और दस हाथ होते हैं:
- बाएं चार हाथों में त्रिशूल, गदा, तलवार और कमंडल धारण करती हैं, जबकि पांचवां हाथ वरद मुद्रा में होता है।
- दाएं चार हाथों में कमल का फूल, बाण, धनुष और जप माला होती है, जबकि पांचवां हाथ अभय मुद्रा में रहता है।
- मां बाघ पर सवार रहती हैं और इनके कंठ में सफेद पुष्पों की माला सुशोभित होती है।
मां चंद्रघंटा की प्रिय वस्तुएं और उनकी महत्ता
- प्रिय फूल: चमेली
- प्रिय भोग: दूध, खीर और शहद
- शासक ग्रह: शुक्र (शुक्ल ग्रह)
मां चंद्रघंटा को ज्ञान की देवी और कल्याण करने वाली माता कहा जाता है। इनकी उपासना से दीर्घायु, स्वास्थ्य, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है। मां की कृपा से भय दूर होता है, आत्मविश्वास बढ़ता है और घर से नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है। मान्यता है कि मां के घंटे की ध्वनि से बुरी आत्माएं और नकारात्मक शक्तियां दूर भागती हैं।
जो लोग नए रास्ते की तलाश में होते हैं, अपने करियर या व्यवसाय में सफलता चाहते हैं, उनके लिए मां चंद्रघंटा की पूजा बहुत फलदायी मानी जाती है।
नवरात्र के उपवास और नियम
- गंगा जल और दूध का सेवन सबसे उत्तम माना जाता है।
- फलाहार या कागजी नींबू का प्रयोग किया जा सकता है।
- यदि फलाहार कठिन हो तो एक समय अरवा भोजन जैसे अरवा चावल, सेंधा नमक, चने की दाल और घी से बनी सब्जी ग्रहण की जा सकती है।
मां चंद्रघंटा की पूजा के मंत्र
मुख्य मंत्र:
“पिण्डज प्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघण्टेति विश्रुता।।”
महामंत्र:
“या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघंटा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।”
बीज मंत्र:
“ऐं श्रीं शक्तयै नमः।”
मां चंद्रघंटा की पूजा विधि-विधान से करने से मन में शांति, जीवन में सफलता और आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।
Navratri Day 3 – Worship of Goddess Chandraghanta, the Goddess of Wisdom and Welfare
Jitendra Kumar Sinha, Patna | March 31, 2025
Navratri – A Festival of Nine Divine Powers
Navratri is celebrated as a festival of the nine divine forms of Goddess Durga. It begins on the first day (Pratipada) and continues until the ninth day (Navami). Each day of Navratri is dedicated to one form of Goddess Durga, and the first three days are devoted to Goddess Shailputri, Brahmacharini, and Chandraghanta.
Third Day of Navratri – Worship of Goddess Chandraghanta
On the third day of Navratri, devotees worship Goddess Chandraghanta, who is known as the Goddess of wisdom and the protector of devotees. She wears a half-moon (Chandra) on her forehead in the shape of a bell (Ghanta), which gives her the name Chandraghanta.
Goddess Chandraghanta has three eyes and ten hands.
- In her four left hands, she holds a trident (Trishul), mace (Gada), sword (Talwar), and a water pot (Kamandalu), while her fifth left hand is in the boon-giving (Varada) posture.
- In her four right hands, she carries a lotus flower (Kamal), arrow (Baan), bow (Dhanush), and a rosary (Japmala), while her fifth right hand is in the protection (Abhaya) posture.
- She rides a tiger and wears a garland of white flowers and a crown studded with jewels.
Offerings and Significance of Goddess Chandraghanta
- Favorite Flower: Jasmine
- Favorite Food: Milk, kheer, and honey
- Planet Ruler: Venus (Shukra)
Goddess Chandraghanta is believed to bless her devotees with long life, good health, happiness, and prosperity. She removes all kinds of evil and negative energies. It is said that the sound of the bell (Ghanta) on her forehead repels negative forces and evil spirits.
People who seek hope, direction in life, or success in their careers and businesses worship Goddess Chandraghanta for guidance and blessings. Her devotees never face a shortage of food or resources.
Navratri Fasting and Rituals
- Water and Milk: The best way to observe the fast is by consuming only the holy Ganga water and milk.
- Fruits and Lemon: Eating fruits or consuming lemon juice is also considered good.
- Simple Meal: If fasting on fruits is difficult, one can have a single meal in the evening, including boiled rice (Arwa Chawal), rock salt (Sendha Namak), gram lentils (Chana Dal), and ghee-based vegetables.
Mantras for Worshiping Goddess Chandraghanta
Main Mantra:
“Pindaj Pravararudha Chandakopastrakairyuta, Prasadam Tanute Mahyam Chandraghante Ti Vishruta.”
Maha Mantra:
“Ya Devi Sarvabhuteshu Maa Chandraghanta Rupena Samsthita, Namastasyai Namastasyai Namastasyai Namo Namah.”
Beej Mantra:
“AIM Shreem Shaktaye Namah.”
By chanting these mantras and following the rituals with devotion, devotees seek the blessings of Goddess Chandraghanta for peace, success, and spiritual enlightenment.