Bettiah | अनिल कुमार शर्मा|
वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा- फसल अवशेष जलाने से मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव और कार्बनिक पदार्थ हो जाते हैं नष्ट।
अवशेष प्रबंधन यंत्रों पर सरकार की ओर से मिल रहा हैं 50 से 80 प्रतिशत तक का अनुदान।
मझौलिया। कृषि विज्ञान केंद्र, माधोपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों से अपील की हैं कि वे फसल कटाई के बाद बचे अवशेषों को जलाने की बजाय खेत में ही मिलाएं, ताकि मिट्टी की उर्वरता और उत्पादकता को बढ़ाया जा सके।

शुक्रवार को जारी संदेश में केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने कहा –
“फसल अवशेष जलाने से मिट्टी में मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीव नष्ट हो जाते हैं और कार्बनिक पदार्थ जलकर समाप्त हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति लगातार घटती हैं।”
उन्होंने बताया कि फसल अवशेष मिट्टी के लिए किसी सोने से कम नहीं हैं। यदि इन्हें मोल्ड बोर्ड प्लाउ, डिस्क प्लाउ, डिस्क हैरो या मल्चर जैसे कृषि यंत्रों की मदद से खेत में मिला दिया जाए, तो ये सड़कर प्राकृतिक खाद का रूप ले लेते हैं। इससे मिट्टी में कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश जैसे आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती हैं। साथ ही मिट्टी की जल धारण क्षमता में सुधार होता हैं और अगली फसल के लिए उर्वरकों पर होने वाला खर्च 15 से 20 प्रतिशत तक कम हो जाता हैं।
डॉ. सिंह ने यह भी बताया –
धान और गेहूं के अवशेषों को खेत में मिलाने से मिट्टी की संरचना बेहतर होती हैं और खरपतवार की समस्या भी कम होती हैं। सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन यंत्रों पर 50 से 80 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा हैं, जिससे किसान आसानी से इन तकनीकों को अपना सकते हैं।
उन्होंने किसानों से अपील की हैं कि वे फसल अवशेषों को आग न लगाएं, बल्कि इसे मिट्टी में मिलाकर खेत की सेहत और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित बनाएं।
Bettiah | Majhauliya | Scientists of Krishi Vigyan Kendra, Madhopur have appealed to the farmers to mix the residues left after harvesting in the fields instead of burning them, so that the fertility and productivity of the soil can be increased.












