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Tuesday, June 9, 2026
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उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के बाद छठ महापर्व सम्पन्न, सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य भगवान की पूजा

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मोतिहारी।आदापुर से शिवशंकर गिरि।

लोक आस्था के महापर्व छठ में बिहार सहित देश के अन्य भागों में पहले डूबते, फिर उगते सूर्य को नमन किया जाता है। इस वर्ष चार दिवसीय महापर्व छठ, परवैतिनों (व्रतियों) द्वारा उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के उपरांत शुक्रवार को संपन्न हो गया। पूर्वी चम्पारण के नकरदेई में सात घोड़ों वाले रथ पर सवार सूर्य देवता की पूजा की गयी।

सात घोड़ों के रथ पर सवार सूर्य देवता व व्रती। फोटो- देश वाणी।

प्रखंड क्षेत्र की विभिन्न नदियों, सरोवरों एवं जल स्रोतों के किनारे स्थापित श्री सविता के पिंड के चारों ओर परवैतिनों ने भगवान भास्कर की पूजा-अर्चना, कीर्तन आदि किया। सर्वप्रथम अस्ताचलगामी सूर्य और फिर उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया गया।

इसी क्रम में, नकरदेई थाना क्षेत्र के कटकेनवा छठ घाट पर सप्त अश्वों से सुसज्जित भगवान भास्कर की भव्य प्रतिमा सरोवर में स्थापित कर पूजन किया गया। माथे पर दउरा लिए परवैतिनों की प्रतिमा मनमोहक थी। छठ घाटों पर स्थानीय थानाध्यक्ष श्यामशरण साह दल-बल के साथ मौजूद थे।

photo- DeshVani

 सूर्य भगवान के रथ में सात घोड़े क्यों?-

समाजसेवी किशोरी पटेल ने कहा कि दैहिक, दैविक और भौतिक त्रिविध तापों (दुखों) को दूर करने के लिए परवैतिन की प्रार्थना का पर्व छठ एक ‘टोटली इको-फ्रेंडली फेस्टिवल’ है, जो उर्जा के अक्षय स्रोत आदित्य (सूर्य) के प्रति ‘थैंक्सगिविंग’ का अवसर है। 

उन्होंने यह भी कहा कि प्रिज्म के अविष्कार के बाद यूरोप के वैज्ञानिकों को पता चला कि सूरज की किरण सात रंगों से बने हैं। वहीं सनातन संस्कृति को हज़ारों वर्षों से मालूम है कि उनके सूर्य भगवान सात घोड़ों वाले रथ पर सवार रहते हैं। तभी तो हमारे हजारों साल पुराने सूर्य मंदिरों सात घोड़ों के ही रथ रहते हैं। हमने तो ‘सर्च’ यानी ‘खोज’ वर्षों पहले कर ली थी। बाद हमारे ग्रंथों को पढ़कर, विदेशी वैज्ञानिक ‘रिसर्च’ यानी ‘दुबारा खोज’  कर रह हैं।

मौके पर सुमन स्नेही, भूषण पटेल उर्फ काजी साहब, रामाकांत पटेल, अशेशर कुमार, राजन मुखिया, विजेशर कुमार, राजकुमार, प्रसून कुमार, विमलेंदु रंजन, राधेश्याम शर्मा, जयचंद शर्मा, राजन शर्मा, सोनू कुमार, चुमन ठाकुर, नीतेश कुमार, नंदन राज सहित सैकड़ों लोग उपस्थित थे।

Tags_Deshvani.in

Chhath Mahaparv Concludes with Offering to the “Rising Sun”, Worship of “Sun God” on a Chariot Drawn by “Seven Horses”. Photo- DeshVani http://tags_deshvani.in/motihari/tags

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