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Tuesday, December 3, 2024
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केन्द्र से टकराव नहीं, पहली कैबिनेट बैठक में पास करेंगे जम्मू-कश्मीर को राज्य-दर्जे का प्रस्ताव : उमर

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मीडिया चैनलों में नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि पहली कैबिनेट की बैठक में ही जम्मू-कश्मीर को राज्य के दर्जे का प्रस्ताव पास करेंगे। उपाध्यक्ष उमर ने यह भी कहा कि टकराव से कुछ हासिल नहीं होगा। केन्द्र से बातचीत से हल निकलेगा।

जम्मू-कश्मीर के लोग रोजगार, विकास और बिजली जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान चाहते हैं, जिसे केवल बातचीत से हल किया जा सकता है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव परिणाम में एनसी और कांग्रेस गठबंधन बहुमत मिलने के और सरकार गठन के पूर्व उमर अब्दुल्ला का यह बयान आया है।

एनसी और कांग्रेस की गठबंधन सरकार बनने के बाद, उनकी पहली कैबिनेट बैठक में जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जाएगा। 

उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार सुचारू रूप से काम करेगी। इसके लिए नेशनल कॉन्फ्रेंस गुरुवार को अपने विधायकों की बैठक बुलाएगी ताकि सरकार बनाने की प्रक्रिया शुरू की जा सके।

उमर ने श्रीनगर में पत्रकारों से कहा कि उनका उद्देश्य केंद्र सरकार पर दबाव डालना है ताकि जम्मू-कश्मीर का राज्य दर्जा बहाल हो सके। उन्होंने कहा कि दिल्ली कभी राज्य नहीं था, जबकि जम्मू-कश्मीर 2019 से पहले राज्य था, जिसे अनुच्छेद 370 हटाने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में बदल दिया गया।

उमर अब्दुल्ला ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों ने राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था। परिसीमन और चुनाव पहले ही हो चुके हैं, अब सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल किया जाना बाकी है। 

नई सरकार और केंद्र के बीच समन्वय के महत्व पर बात करते हुए उमर ने कहा कि टकराव से कुछ हासिल नहीं होगा। जम्मू-कश्मीर के लोग रोजगार, विकास और बिजली जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान चाहते हैं, जिसे केवल बातचीत से हल किया जा सकता है।

उमर अब्दुल्ला ने यह भी कहा कि गठबंधन की सरकार बनाने के लिए एनसी और उसके सहयोगी दल जल्द ही बैठक करेंगे और राजभवन जाकर सरकार बनाने का दावा पेश करेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि कुछ ही दिनों में नई सरकार बन जाएगी। 

पीडीपी के साथ गठबंधन पर उन्होंने कहा कि फिलहाल कोई चर्चा नहीं हुई है। चुनाव परिणामों से पीडीपी को झटका लगा है, इसलिए वे शायद अभी आंतरिक चर्चाएं कर रहे होंगे। यदि भविष्य में बातचीत की जरूरत हुई तो इस पर विचार किया जाएगा। 

अब्दुल्ला ने कहा कि 2018 से जम्मू-कश्मीर के लोगों की आवाज नहीं सुनी गई है। अब समय आ गया है कि उनकी समस्याओं को सुलझाने के लिए काम किया जाए।

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