रक्षा खरीद और ऊर्जा नीति-
विदेश मंत्रालय ने आज स्पष्ट किया कि भारत अपनी रक्षा ज़रूरतों को पूरी तरह से अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक आकलन के आधार पर पूरा करता है। मंत्रालय के प्रवक्ता, रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में मीडिया को संबोधित करते हुए यह बात कही। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रक्षा खरीद के मामले में भारत अपने राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखता है।
ऊर्जा के मामले में, प्रवक्ता ने कहा कि भारत बाज़ार में उपलब्ध विकल्पों और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है। यह दर्शाता है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए विभिन्न स्रोतों पर निर्भर करता है।
भारत-रूस और भारत-अमेरिका संबंध-
भारत और रूस के संबंधों पर एक सवाल के जवाब में, प्रवक्ता ने कहा कि विभिन्न देशों के साथ भारत के द्विपक्षीय संबंध अपने आप में महत्वपूर्ण हैं और उन्हें किसी तीसरे देश के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत और रूस की साझेदारी स्थिर और समय-परीक्षित है।
श्री जायसवाल ने भारत और अमेरिका के संबंधों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों देश एक व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं, जो साझा हितों, लोकतांत्रिक मूल्यों और मजबूत लोगों से लोगों के संबंधों पर आधारित है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत-अमेरिका साझेदारी ने कई बदलावों और चुनौतियों का सामना किया है और यह मजबूत बनी हुई है।
उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच संबंध लगातार आगे बढ़ते रहेंगे।
निमिषा प्रिया मामला-
निमिषा प्रिया के मामले को लेकर, प्रवक्ता ने इसे एक संवेदनशील मामला बताया और कहा कि सरकार इस मामले में हर संभव सहायता दे रही है। उन्होंने बताया कि सरकार के लगातार प्रयासों के कारण यमन में स्थानीय अधिकारियों ने उनकी सज़ा को टाल दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत इस मामले पर कड़ी नज़र रखे हुए है और सभी संभावित मदद दी जा रही है। उन्होंने यह भी बताया कि नई दिल्ली इस मामले पर कुछ मित्र देशों के संपर्क में भी है।
उन खबरों को खारिज करते हुए जिनमें दावा किया गया था कि निमिषा प्रिया की मौत की सज़ा रद्द कर दी गयी है और उनकी रिहाई के लिए समझौता हो गया है, श्री जायसवाल ने कहा कि ये खबरें गलत हैं। उन्होंने इसे एक संवेदनशील मामला बताते हुए सभी पक्षों से गलत सूचनाओं से दूर रहने का आग्रह किया।
उन्होंने दोहराया कि गलत सूचनाओं और अटकलों पर आधारित मीडिया रिपोर्टें इस संवेदनशील और जटिल मामले में बिल्कुल भी मददगार नहीं हैं।