Bettiah । अनिल कुमार शर्मा।
मझौलिया। छोटे और सीमांत किसानों के लिए कम जमीन में अधिक आय का सपना अब ‘मल्टीलेयर सब्जी खेती’ तकनीक से हकीकत में बदल रहा हैं। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), माधोपुर के वैज्ञानिकों ने किसानों को इस आधुनिक पद्धति को अपनाने की सलाह दी हैं, जिससे एक ही खेत से एक साथ कई फसलें उगाकर आमदनी को कई गुना बढ़ाया जा सकता हैं।
शनिवार को केंद्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. अभिषेक प्रताप सिंह ने बताया कि इस तकनीक में फसलों का चयन उनकी ऊंचाई के आधार पर किया जाता हैं। इसमें सबसे नीचे यानी भूमिगत स्तर पर अदरक, हल्दी या गाजर जैसी फसलें लगायी जाती हैं। जमीन की ऊपरी सतह पर लौकी, कद्दू या खीरा और मध्यम ऊंचाई पर टमाटर, बैंगन व मिर्च उगाए जाते हैं। वहीं, सबसे ऊपर मचान की सहायता से करेला, सेम और नेनुआ जैसी बेल वाली फसलें चढ़ायी जाती हैं।
डॉ. सिंह के अनुसार, जहां एक बीघा में केवल टमाटर की खेती से करीब 50 हजार रुपये की आय होती हैं, वहीं मल्टीलेयर पद्धति से यह बढ़कर 1.5 से 2 लाख रुपये तक पहुंच सकती हैं। इस तकनीक में एक ही खाद, पानी और श्रम में कई फसलें तैयार होती हैं, जिससे लागत में भारी कमी आती हैं। एक फसल के खराब होने पर दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई हो जाती हैं और किसानों को साल भर रोजगार मिलता रहता हैं। केवीके परिसर में इसकी प्रदर्शन इकाई स्थापित की गयी हैं, जहां किसान इस आधुनिक ढांचे और सिंचाई के तरीकों को देखकर प्रशिक्षण ले सकते हैं।
Bettiah | Madhopur KVK More profits from less land: ‘Multilayer’ farming is changing the fortunes of small farmers.












