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एमजेके कॉलेज में मनाई गई महर्षि वाल्मीकि जयंती, विद्यार्थियों ने निबंध प्रतियोगिता में लिया भाग

देशवाणी। अवधेश कुमार शर्मा।

बेतिया। पश्चिम चम्पारण जिला मुख्यालय स्थित महारानी जानकी कुँवर महाविद्यालय (एमजेके कॉलेज) के संस्कृत विभाग के तत्वावधान में सोमवार को महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई गई। इस अवसर पर शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. नवल किशोर बैठा ने की, जबकि संचालन एवं संयोजन संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. विभाकर दुबे ने किया।

रामायण में निहित हैं जीवन के उच्च आदर्श

समारोह के मुख्य वक्ता डॉ. विद्यासागर उपाध्याय ने महर्षि वाल्मीकि के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि महर्षि वाल्मीकि केवल आदिकवि ही नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति, नैतिकता और मानवीय मूल्यों के महान संवाहक भी थे। उनकी अमर कृति रामायण भारतीय समाज के लिए धार्मिक एवं साहित्यिक ग्रंथ होने के साथ-साथ आदर्श शासन व्यवस्था, सामाजिक न्याय, मानवीय संवेदना, कर्तव्यनिष्ठा और लोककल्याण का शाश्वत मार्गदर्शक है।

उन्होंने कहा कि वाल्मीकि रामायण में वर्णित राजधर्म की अवधारणा आधुनिक लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था के लिए भी प्रासंगिक है। महर्षि वाल्मीकि के साहित्य में सत्य, न्याय, करुणा, समानता और मानवीय गरिमा पर आधारित आदर्श समाज की परिकल्पना की गई है। वर्तमान समय में युवाओं को उनके विचारों एवं आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्र और समाज के निर्माण में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

भारतीय ज्ञान परंपरा के महान आधार स्तंभ हैं वाल्मीकि

अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. नवल किशोर बैठा ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व की प्राचीनतम और समृद्ध बौद्धिक परंपराओं में से एक है। महर्षि वाल्मीकि इसके महान आधार स्तंभ हैं। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि ज्ञान, साधना, आत्मचिंतन और नैतिक आचरण के माध्यम से मनुष्य समाज में विशिष्ट स्थान प्राप्त कर सकता है।

उन्होंने कहा कि रामायण में वर्णित आदर्श आज भी पारिवारिक जीवन, सामाजिक संबंधों, प्रशासनिक व्यवस्था और राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरणास्रोत हैं। विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, साहित्य और नैतिक मूल्यों का भी गहन अध्ययन करना चाहिए।

प्राचार्य ने कहा कि महाविद्यालय में इस प्रकार के शैक्षणिक एवं बौद्धिक आयोजनों का उद्देश्य विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना और उन्हें अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना है। आदिकाव्य रामायण की रचना भारतीय साहित्यिक इतिहास की युगांतकारी घटना है। महर्षि वाल्मीकि के साहित्य में प्रकृति, मानवता, करुणा, सामाजिक उत्तरदायित्व और जीवन के उच्च आदर्शों का अद्भुत समन्वय मिलता है। उन्होंने संस्कृत विभागाध्यक्ष के प्रयासों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा के महान ऋषियों, साहित्यकारों और दार्शनिकों के विचारों से परिचित कराने पर बल दिया।

निबंध प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने व्यक्त किए विचार

कार्यक्रम के संयोजक एवं संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. विभाकर दुबे ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि संस्कृत साहित्य के महान मनीषी थे। उन्होंने अपनी अद्वितीय काव्य प्रतिभा से भारतीय साहित्य और समाज को नई दिशा प्रदान की। उनके विचार युगों-युगों तक मानव समाज का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

उन्होंने बताया कि जयंती के अवसर पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता का उद्देश्य विद्यार्थियों में अध्ययन, चिंतन, लेखन और रचनात्मक अभिव्यक्ति की प्रवृत्ति विकसित करना है। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने महर्षि वाल्मीकि के जीवन दर्शन, रामायण की समकालीन प्रासंगिकता, भारतीय संस्कृति में उनके योगदान और सामाजिक समरसता से जुड़े विचारों को लेखबद्ध किया। इस आयोजन के माध्यम से विद्यार्थियों में साहित्यिक अभिरुचि, मौलिक चिंतन और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता विकसित करने का प्रयास किया गया।

प्राध्यापकों और विद्यार्थियों की रही सहभागिता

कार्यक्रम में महाविद्यालय के बर्सर डॉ. योगेंद्र सम्यक, डॉ. विकास कुमार, डॉ. शफी अहमद, डॉ. सामी हसन, डॉ. अब्दुल कादिर, डॉ. किशोरी लाल राम, डॉ. गौतम कुमार, डॉ. प्रेम सागर, डॉ. गजेंद्र कुमार, डॉ. विपिन दुबे सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। उपस्थित प्राध्यापकों ने महर्षि वाल्मीकि के साहित्यिक, सांस्कृतिक और दार्शनिक योगदान को स्मरण करते हुए वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के समापन पर डॉ. चंदेल कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने प्राचार्य, मुख्य वक्ता, उपस्थित प्राध्यापकों, विद्यार्थियों और आयोजन से जुड़े सभी सदस्यों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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