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29 अक्टूबर को मनाया जाएगा अखंड सौभाग्य का पर्व करवा चौथ, जानिए चंद्रोदय का समय और पूजन विधि

-पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक करवा चौथ का व्रत

-सौभाग्यवती स्त्रियों में अत्यंत लोकप्रिय इस व्रत को लेकर महिलाओं में रहता है भारी उत्साह

-शिव-पार्वती और चंद्रदेव की पूजा से सुखमय बनता है वैवाहिक जीवन

देश वाणी। दिलीप दुबे

मोतिहारी। कार्तिक कृष्ण पक्ष की चंद्रोदय व्यापिनी चतुर्थी तिथि पर रखे जाने वाले करवा चौथ व्रत में विवाहित स्त्रियां अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य, यश और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। इस दिन महिलाएं पूरे दिन निराहार और निर्जला रहकर चंद्रोदय की प्रतीक्षा करती हैं।

छोटा बरियारपुर, महर्षिनगर स्थित आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने बताया कि इस दिन रात्रि 07:57 बजे के बाद चंद्रमा के दर्शन होंगे। चंद्रमा के दर्शन और पारंपरिक तरीके से चंद्रार्घ्य देने के पश्चात, महिलाएं अपने पति के हाथ से जल ग्रहण कर ही अपना व्रत संपन्न करती हैं।

इस पावन पर्व पर मुख्य रूप से भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान कार्तिकेय, गणेश जी और चंद्रदेव का पूजन किया जाता है। हिंदू धर्म में चंद्रमा को आयु वृद्धि और शीतलता का कारक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की पूजा करने से आयु में वृद्धि होती है और दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है। संक्षेप में कहें तो करवा चौथ का यह व्रत पति-पत्नी के बीच अटूट विश्वास, समर्पण और प्रेम की भावना को और अधिक प्रगाढ़ बनाता है।

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