देश वाणी। दिलीप दुबे
मोतिहारी। हिन्दू पंचांग के अनुसार वर्ष का आठवां महीना यानी कार्तिक मास बेहद पवित्र और फलदायी माना जाता है। यह पूरा महीना जगत के पालनहार भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस पावन महीने में सच्चे मन से पूजा-पाठ और व्रत करने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और अंत में बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। इस वर्ष कार्तिक मास की शुरुआत 26 अक्टूबर, सोमवार से हो गयी है।
ब्रह्म मुहूर्त स्नान और दीपदान से बरसेगी कृपा
कार्तिक मास में भगवान विष्णु की कृपा पाने के लिए विशेष नियमों और उपायों का पालन करना चाहिए। बेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पांडेय के अनुसार, कार्तिक मास में सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना बेहद शुभ फलदायी माना गया है। इस दौरान यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी में स्नान करें, अन्यथा घर के पानी में ही थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं। इसके साथ ही, इस माह में शरद पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक नियमित रूप से दीपदान करने की परंपरा है। आप अपने घर के मुख्य द्वार या तुलसी के पौधे के पास दीया जलाकर सुख-समृद्धि की कामना कर सकते हैं, जिससे माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं।
तुलसी पूजन और संयमित जीवन शैली का महत्व
उन्होंने ने बताया कि तुलसी के पौधे में माता लक्ष्मी का वास होता है और यह भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। कार्तिक मास में तुलसी की विशेष पूजा का विधान है, क्योंकि इसी माह देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु योग निद्रा से जागकर सबसे पहले तुलसी जी की पुकार सुनते हैं। इसके अलावा, इस पूरे महीने में जमीन पर सोने और ब्रह्मचर्य व्रत का कड़ाई से पालन करना चाहिए। इन नियमों को अपनाने से मन में सात्विक और पवित्र विचार आते हैं, जिससे साधक को जीवन में सुख-शांति और अंत में मोक्ष की प्राप्ति होती है।



