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Sunday, July 19, 2026
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सप्तक्रांति एक्सप्रेस की पैंट्रीकार से शराब की एक और बड़ी खेप बरामद, मैनेजर गिरफ्तार

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Bettiah[रवि कुमार मिश्रा]

आनंद विहार से मुजफ्फरपुर जाने वाली 12558 सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस एक बार फिर शराब तस्करी को लेकर सुर्खियों में है। ट्रेन की पैंट्रीकार से भारी मात्रा में ब्रांडेड विदेशी शराब बरामद होने के बाद रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और तस्करों के सिंडिकेट पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोमवार को नरकटियागंज आरपीएफ ने एक सजग यात्री की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए शराब तस्करी के आरोप में पैंट्रीकार के मैनेजर को दबोच लिया है।

आरपीएफ पोस्ट कमांडर आर.आर. कश्यप ने बताया कि बगहा निवासी मनीष कुमार की गुप्त सूचना पर आरपीएफ टीम ने ट्रेन के पैंट्रीकार में सघन तलाशी अभियान चलाया। तलाशी के दौरान पैंट्रीकार से एक ट्रॉली बैग और एक पिट्ठू बैग बरामद हुआ, जिसे खोलने पर सुरक्षाकर्मी दंग रह गए। दोनों बैगों से कुल 62 बोतल ब्रांडेड विदेशी शराब बरामद की गई। आरपीएफ ने इस मामले में पैंट्रीकार मैनेजर अजय कुमार को गिरफ्तार कर लिया है।

वही ​सूचनाकर्ता मनीष कुमार ने आरोप लगाया कि जब उन्होंने ट्रेन में शराब तस्करी होते देख इसकी सूचना अधिकारियों को देने का प्रयास किया, तो पैंट्रीकार मैनेजर अजय कुमार और उसके कर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की। मनीष कुमार ने बताया कि वह इस संबंध में मैनेजर व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया में हैं। 

गौरतलब है कि महज कुछ दिन पहले, 11 जून को भी इसी सप्तक्रांति सुपरफास्ट एक्सप्रेस की पैंट्रीकार से भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की गई थी। उस समय भी पैंट्रीकार मैनेजर समेत चार लोगों को जेल भेजा गया था। इसके बावजूद इतनी जल्दी दोबारा उसी ट्रेन से तस्करी होना सुरक्षा दावों की पोल खोलता है।

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पैंट्रीकार से शराब की जब्ती के बाद रसूखदारों द्वारा मामले को रफा-दफा करने और कार्रवाई को प्रभावित करने का भी प्रयास किया गया, लेकिन आरपीएफ ने सख्ती बरतते हुए कार्रवाई को अंजाम दिया। आरपीएफ अधिकारियों का कहना है कि बरामद शराब किसकी थी और मुजफ्फरपुर में इसे किसे डिलीवर किया जाना था, इसकी जांच की जा रही है। ​लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि लगातार गिरफ्तारियों के बाद भी इस रैकेट का मास्टरमाइंड कौन है, जो पर्दे के पीछे से पैंट्रीकार को शराब का सुरक्षित ठिकाना बना रहा है?

​​लगातार हो रही इन घटनाओं ने रेल पुलिस और आरपीएफ की खुफिया सूचना प्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि यदि एक आम यात्री की सजगता से इतनी बड़ी खेप पकड़ी जा सकती है, तो पुलिस का अपना सूचना तंत्र पहले से सक्रिय क्यों नहीं था? अब देखना होगा कि रेल पुलिस इस सिंडिकेट की जड़ों तक पहुंच पाती है या पैंट्रीकार से तस्करी का यह खेल यूं ही बदस्तूर जारी रहेगा।

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