Bettiah| भूपेश कुमार|
गौनाहा। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्रसिद्ध ठोरी बाजार इन दिनों सन्नाटे की आगोश में हैं। नेपाल सरकार द्वारा जारी एक विवादास्पद आदेश ने सीमावर्ती भारतीय व्यापारियों की कमर तोड़ दी हैं। नेपाली प्रधानमंत्री बालेन साह के नेतृत्व वाली सरकार ने फरमान जारी किया है कि भारत से कोई भी व्यक्ति 100 नेपाली रुपये (लगभग 62.50 भारतीय रुपये) से अधिक मूल्य का सामान खरीदकर नेपाल नहीं ले जा सकता। यदि कोई इससे अधिक का सामान ले जाता है, तो उसे भारी टैक्स देना होगा अन्यथा सामान ज़ब्त कर लिया जाएगा।
इस आदेश का सबसे बुरा असर भीखना ठोरी के लगभग 40 किराना, कपड़ा और इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापारियों पर पड़ा हैं। किराना व्यवसायी पूना सिंह ने बताया कि नेपाली ग्राहक न के बराबर आ रहे हैं। जो ग्राहक हिम्मत जुटाकर आते भी हैं, उनसे नेपाल सीमा पर तैनात एपीएफ (आर्म्ड पुलिस फोर्स) के जवान सामान छीन ले रहे हैं। स्थिति यह है कि दुकानों में रखा सामान एक्सपायर होने के कगार पर है, जिससे व्यापारियों को भारी आर्थिक क्षति होने की आशंका हैं।
गरीब तबके की बढ़ी मुश्किलें-
नेपाल के सीमावर्ती गांवों वसंतपुर और सोबरम पुर की महिलाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि नेपाल में दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमत भारत की तुलना में बहुत अधिक हैं। भीखना ठोरी से उन्हें सस्ते दामों पर जरूरत का सामान मिल जाता था, लेकिन अब मजबूरी में वही भारतीय सामान उन्हें नेपाल के स्थानीय बाजारों में मोटी रकम देकर खरीदना पड़ रहा हैं। इस फरमान ने विशेषकर मजदूर और गरीब वर्ग की कमर तोड़ दी हैं।
जमुनिया और साप्ताहिक बाजार की रौनक हुई गायब-
नेपाली ग्राहकों से गुलजार रहने वाला जमुनिया बाजार भी अब वीरान पड़ा हैं। यहाँ से लोग कपड़े, प्लंबरिंग और बाइक के पार्ट्स सस्ते में ले जाते थे। यही हाल भीखना ठोरी के शिव मंदिर के पास लगने वाले साप्ताहिक गुरुवार बाजार का भी हैं। लाखों रुपये का कारोबार करने वाला यह बाजार अब नगण्य ग्राहकों की बाट जोह रहा हैं। सीमावर्ती व्यापारियों ने भारत और नेपाल सरकार से इस समस्या के समाधान हेतु कूटनीतिक पहल करने की गुहार लगायी हैं।












