किसानों ने फसल क्षति का सर्वे कर मुआवजे की मांग की।
देश वाणी। नौशाद अहमद। लौरिया।
लौरिया। बाढ़ के पानी ने लौरिया प्रखंड क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ा दी है। नदी तटवर्ती इलाकों के दर्जनों गांवों में खेतों में पानी जमा रहने से धान और गन्ने की फसल प्रभावित हो रही है। कई खेतों में लंबे समय से पानी भरा रहने के कारण फसलें सड़ने और सूखने लगी हैं। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान की आशंका है।
लौरिया नगर पंचायत क्षेत्र के पकड़ी, नुनियाटोला, सिसवनिया, लाकड़ सिसई सहित नदी तटवर्ती कई गांवों में बाढ़ का पानी अब भी खेतों में जमा है। किसानों के अनुसार, सबसे अधिक नुकसान गन्ने की फसल को होने की आशंका है। गन्ना क्षेत्र के किसानों के लिए प्रमुख नगदी फसल है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से गन्ने के पौधों के सड़ने के साथ उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।
वहीं धान की फसल भी कई जगहों पर पानी में डूबी हुई है। लगातार जलजमाव के कारण धान के पौधे कमजोर पड़ने लगे हैं और कई खेतों में फसल खराब होने की स्थिति में पहुंच गई है। किसानों का कहना है कि बाढ़ के कारण खेतों में पानी भरने से इस साल खेती की लागत निकलना भी मुश्किल हो सकता है।
किसानों ने बताया कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है। ऐसे में फसल बर्बाद होने से परिवार की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी। किसानों ने प्रशासन से बाढ़ प्रभावित गांवों में तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराने और प्रभावित किसानों को सरकारी प्रावधान के अनुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की मांग की है।
किसानों का कहना है कि समय रहते फसल क्षति का आकलन कर सहायता नहीं मिली तो आने वाले दिनों में आर्थिक परेशानी और बढ़ सकती है।



