HomeBIHARमोतिहारीअब चंपारण लेगा अनानास की मिठास का आनंद : डीन

अब चंपारण लेगा अनानास की मिठास का आनंद : डीन

-आम, लीची व अमरूद के बागों में अंतरफसली खेती को मिलेगा बढ़ावा

-तीन किस्मों का हो रहा मूल्यांकन

फोटो : पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय परिसर में अनानास की खेती

माला सिन्हा 

पीपराकोठी : चंपारण के किसानों की आय के स्रोतों में विविधता लाने और उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से पंडित दीनदयाल उपाध्याय उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय ने अनानास की खेती की संभावनाओं का मूल्यांकन शुरू किया है. महाविद्यालय द्वारा चंपारण की मिट्टी एवं जलवायु के अनुकूल अनानास की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में वैज्ञानिक स्तर पर प्रयोग किए जा रहे हैं. खासकर आम, लीची और अमरूद जैसे फलदार पौधों के बीच खाली स्थान का उपयोग करते हुए अनानास को अंतरफसली फसल के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है. महाविद्यालय परिसर में अनानास की क्वीन, क्यू और एमडी-2 किस्मों का मूल्यांकन किया जा रहा है. इन किस्मों के पौधे ओडिशा और पश्चिम बंगाल से लाए गए हैं. वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से इन किस्मों की वृद्धि, उत्पादन क्षमता तथा चंपारण की स्थानीय परिस्थितियों में अनुकूलता का अध्ययन किया जा रहा है. फसल में पानी और पोषक तत्वों के बेहतर उपयोग के लिए मल्चिंग, फर्टिगेशन सिस्टम और सेंसर आधारित तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है. इसका उद्देश्य कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त करने के साथ संसाधनों की बचत करना है. यदि प्रयोग सफल रहा तो किसानों को अपने मौजूदा बागों में अतिरिक्त आय के लिए अनानास की खेती का एक नया विकल्प मिल सकेगा. महाविद्यालय के डीन डॉ. कुंदन किशोर ने बताया कि फल उत्पादकों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के लिए अनानास की खेती में आधुनिक तकनीकों और सेंसर आधारित उपकरणों के इस्तेमाल पर ध्यान दिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि चंपारण और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अनानास की खेती को बढ़ावा देने के लिए गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री तैयार करना भी महाविद्यालय की प्राथमिकता होगी. उन्होंने बताया कि इस पहल से किसानों और छात्रों को प्रशिक्षण, उद्यमिता तथा मूल्य संवर्धन के नए अवसर मिलेंगे. साथ ही अनानास की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और बाजार से जोड़ने की दिशा में भी काम किया जाएगा. इससे ‘खेत से बाजार’ तक की पूरी व्यवस्था विकसित करने में मदद मिलेगी और किसानों के साथ ग्रामीण युवाओं व महिलाओं के लिए भी रोजगार एवं आजीविका के नए अवसर पैदा हो सकते हैं.

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