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नरकटियागंज में बलोर नदी का पुल 12 साल में ही जर्जर, खंभों से झांक रहा सरिया, बड़े हादसे को लेकर मंडरा रहा खतरा,गुणवत्ता पर सवाल

बेतिया, रवि कुमार मिश्रा।

बेतिया/नरकटियागंज-रामनगर मुख्य पथ पर बलोर नदी पर बना पुल निर्माण के महज 12 वर्षों के भीतर ही अपनी बदहाली के आंसू बहा रहा है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस पुल की स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि इसके खंभों का कंक्रीट उखड़ चुका है और अंदर लगा लोहे का सरिया साफ दिखाई दे रहा है।

पुल की इस जर्जर संरचना के कारण स्थानीय ग्रामीणों में किसी बड़े हादसे को लेकर गहरा खौफ बना हुआ है। जानकारी के अनुसार इस पुल का उद्घाटन वर्ष 2014 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी द्वारा किया गया था। स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के मात्र 12 साल बाद ही पुल का इस कदर क्षतिग्रस्त होना इसके निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 

​स्थानीय ग्रामीण अमजद अली, मो.दिलशाद और मो. अब्बास ने बताया कि पुल के पूर्वी तरफ का पिलर नीचे से पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। कंक्रीट हटने से उसकी बुनियाद का सरिया हवा में तैर रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह एक पहाड़ी नदी है और बरसात के दिनों में इसमें बाढ़ आती है। पिलर कमजोर होने के कारण भारी वाहनों के गुजरते समय यह कभी भी बैठ सकता है।

अगर समय रहते इसकी सुध नहीं ली गई, तो पुल कभी भी जमींदोज हो सकता है। ​इस मार्ग से रोजाना हजारों की संख्या में राहगीर और भारी मालवाहक वाहन गुजरते हैं। चंद दिनों में मानसून की दस्तक के साथ ही नदी के जलस्तर और पुल पर दबाव दोनों बढ़ने वाले हैं। ऐसे में प्रशासन की यह सुस्ती किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है।

उधर ​मामले को लेकर जब पुल निर्माण विभाग के जूनियर इंजीनियर पिंकू कुमार से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि मामले की जानकारी पथ निर्माण विभाग को दी जा रही है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही तकनीकी जांच कराकर आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।​अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर कब तक सुध लेता है या फिर विभाग किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही जागेगा।

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