बिना अनुमति नगर प्रबंधक के कक्ष में बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी और सरकारी संचिका दिखाने के आरोप से मचा हड़कंप, पुलिस ने अधिकारियों-कर्मियों से आमने-सामने की पूछताछ
ररक्सौल।अनिल कुमार। नगर परिषद रक्सौल में एक बार फिर कार्यालयी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर प्रबंधक के कार्यकक्ष का कथित रूप से बिना अनुमति इस्तेमाल किए जाने, वहां बाहरी व्यक्ति को बैठाकर सरकारी संचिकाएं दिखाए जाने और कार्यालय की निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे के साथ छेड़छाड़ किए जाने के आरोप ने नगर परिषद की व्यवस्था को कठघरे में खड़ा कर दिया है। मामला सामने आने के बाद गुरुवार को हरैया थाना पुलिस नगर परिषद कार्यालय पहुंची और कई घंटे तक पूरे प्रकरण की पड़ताल की।
हरैया थानाध्यक्ष किशन कुमार पासवान के नेतृत्व में पुलिस जवानों की टीम ने नगर परिषद कार्यालय पहुंचकर संबंधित अधिकारियों और कर्मियों से पूछताछ की। पुलिस की जांच केवल सीसीटीवी कैमरे तक सीमित नहीं रही, बल्कि सरकारी संचिकाओं के इस्तेमाल, बाहरी व्यक्ति की कार्यालय में मौजूदगी, नगर प्रबंधक के कक्ष के कथित अनधिकृत इस्तेमाल, सरकारी कार्य में बाधा तथा साक्ष्यों से कथित छेड़छाड़ जैसे बिंदुओं को भी जांच के दायरे में रखा गया।
एक ही मामले में सामने आए अलग-अलग बयान
पुलिस जांच के दौरान उच्च वर्गीय सहायक, प्रभारी प्रधान सहायक , कर संग्राहक, कार्यवाहक सभापति सहित अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान संबंधित संचिका और सीसीटीवी को लेकर अलग-अलग बयान सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है। उच्च वर्गीय सहायक मृत्युंजय मृणाल ने पुलिस को बताया कि संबंधित संचिका की मांग उनसे प्रभारी प्रधान सहायक चंदेश्वर बैठा ने की थी। वहीं प्रभारी प्रधान सहायक चंदेश्वर बैठा ने पुलिस को बताया कि संचिका की मांग कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी की ओर से की गई थी। इतना ही नहीं, बैठा के अनुसार सीसीटीवी कैमरा हटाने का निर्देश भी कार्यवाहक सभापति की ओर से दिया गया था।
सभापति बोलीं- महिला होने के कारण कैमरा हटाने को कहा था
वहीं कार्यवाहक सभापति पुष्पा देवी ने पुलिस को बताया कि वे महिला हैं और कार्यालय कक्ष में सीसीटीवी कैमरा लगा होना उन्हें उचित नहीं लग रहा था। इसी कारण उन्होंने प्रभारी प्रधान सहायक को कैमरा हटाने का निर्देश दिया था।
अब पुलिस के सामने सवाल यह है कि कैमरा हटाने या उसके साथ छेड़छाड़ की वास्तविक परिस्थिति क्या थी? क्या इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था? संबंधित संचिका किसके निर्देश पर निकाली गई और उसे किस व्यक्ति को दिखाया गया? कार्यालय में बाहरी व्यक्ति की मौजूदगी किन परिस्थितियों में हुई? इन सभी बिंदुओं पर पुलिस साक्ष्य जुटा रही है।
सीसीटीवी ही बना जांच का अहम सुराग
नगर परिषद कार्यालय में सुरक्षा और गतिविधियों की निगरानी के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरे के साथ कथित छेड़छाड़ ने मामले को और गंभीर बना दिया है। कार्यालय में होने वाली गतिविधियों की रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती थी। ऐसे में कैमरे को क्षतिग्रस्त किए जाने अथवा हटाए जाने की परिस्थिति की जांच पुलिस के लिए अहम मानी जा रही है।
पुलिस ने मौके पर सीसीटीवी कैमरे की स्थिति का निरीक्षण किया तथा संबंधित कार्यालय कक्ष और संचिकाओं की भी जांच की। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि कैमरे के साथ वास्तव में क्या हुआ और इसके पीछे किसका निर्देश अथवा भूमिका थी।
‘फाइल’ किसके आदेश पर निकली, किसे दिखाई गई?
मामले में सबसे बड़ा सवाल सरकारी संचिका को लेकर है। यदि कार्यालय की संचिका किसी बाहरी व्यक्ति को दिखाई गई, तो उसे किस अधिकारी अथवा कर्मी के निर्देश पर उपलब्ध कराया गया? क्या इसके लिए कोई लिखित आदेश था? संचिका में दर्ज सरकारी सूचनाओं को किसी बाहरी व्यक्ति के समक्ष रखने की अनुमति किस स्तर से दी गई? पुलिस इन सवालों के जवाब तलाश रही है।
पूछताछ में सामने आए बयानों के आधार पर पुलिस मामले की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। संबंधित लोगों के बयान और कार्यालय में उपलब्ध साक्ष्यों का मिलान किया जा रहा है।
थानाध्यक्ष बोले- सीसीटीवी से छेड़छाड़ कानूनन अपराध
हरैया थानाध्यक्ष किशन कुमार पासवान ने बताया कि मामले की जांच की गई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सीसीटीवी कैमरे के साथ छेड़छाड़ करना कानूनन अपराध है। मामले से जुड़े सभी तथ्यों और साक्ष्यों की जांच की जा रही है। जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अब निगाह पुलिस जांच पर है। नगर परिषद के भीतर संचिका के इस्तेमाल से लेकर सीसीटीवी कैमरे से छेड़छाड़ तक उठे सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल पुलिस की पूछताछ और जांच ने नगर परिषद के इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है।
30 लाख रुपए रंगदारी मांगने एवं जाति सूचक शब्द का प्रयोग करने का लगाया आरोप
रक्सौल नगर परिषद के प्रभारी प्रधान सहायक चंदेश्वर बैठा ने नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी डॉक्टर मनीष कुमार और कर संग्राहक पंकज कुमार सिंह पर 30 लाख रंगदारी मांगने का आरोप लगाया है। वही पैसा नहीं देने पर जाति सूचक शब्दों का प्रयोग करते हुए अपमानजक व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करने के लिए हरैया थाना में आवेदन दिया है।
फोटो -नगर परिषद में ‘फाइल कांड’ पर पुलिस की दस्तक, सीसीटीवी से छेड़छाड़ की जांच शुरू



