मोतिहारीः चंपारण किसान-मजदूर संघर्ष समिति के तत्वावधान में समाहरणालय के समक्ष एकदिवसीय महापंचायत सह धरना दिया गया।संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष संजय सिंह के नेतृत्व में आयोजित महापंचायत में जिला के सैकड़ों महिला-पुरुष किसान शामिल हुए।महापंचायत और धरना के बाद संघर्ष समिति ने प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट को अपनाछह सूत्री मांगपत्र सौंपा।इस मौके पर किसान-मजदूर संघर्ष समिति से जुड़े सुभाष कुशवाहा ने कहा कि बिहार सरकार द्वारा चंपारण के किसान मजदूरों की रैयती जमीन को बेतिया राज की जमीन बताकर हड़पने की दमनकारी एवं षड्यंत्रकारी नीतियों के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।चंपारण की भूमि संघर्षों की भूमि रही है।लेकिन सरकार की नियत में खोट है।इसलिए अंग्रेजों द्वारा जिला के किसानों को बंदोवस्त किए गए भूमि को जबरन हड़पना चाहती है।जिसे यहां के किसान होने नहीं देंगे।
वहीं संघर्ष समिति के जिलाध्यक्ष संजय सिंह ने कहा कि पूर्व में भी अपनी मांग को लेकर हम किसनों ने धरना प्रदर्शन किया था और अपने मांगपत्र को सौंपा था।इतने दिनों बाद भी सरकार ने हम किसानों के मांग पर ध्यान नहीं दिया है।इसलिए सरकार को उसके कुंभकर्णी नींद से जगाने के लिए हमलोग महापंचायत और धरना दे रहे हैं।अगर सरकार ने हमलोगों के मांग पर ध्यान नहीं दिया।तो इस आंदोलन को राज्यव्यापी रुप दिया जाएगा।
संघर्ष समिति के प्रधान महासचिव रविंद्र सिंह कुशवाहा ने कहा कि सरकार ने अगर हम किसानों की मांगों पर विचार नहीं किया।तो यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है।
वहीं संघर्ष समिति के प्रवक्ता मो. कौसर साहब ने कहा कि किसानों की कई पीढ़ियां जिस जमीन को जोतते आ रही है।उस जमीन को सरकार जबरन हड़पना चाहती है।जिसके खिलाफ किसान अब जाग चुके हैं और सरकार की गलत मंशा के खिलाफ शांतिपूर्ण संघर्ष को तैयार हैं।
किसानों द्वारा सरकार को डीएम के माध्यम से सौंपे गए मांगपत्र के अनुसार बिहार सरकार किसानों मजदूरों के रैयती जमीन हड़पने की षड्यंत्रकारी एवं दमनकारी कानून को वापस करें,भारत जैसे कृषि प्रधान देश में किसानों को खाद-बीज की महँगाई के साथ किल्लत एवं जिल्लत पर रोक लगाई जाए,बिना वजह किसानों की जमीन का खरीद-बिक्री दाखिल खारीज पर रोक लगाकर किसानों के बच्चों की पढ़ाई, बुजगों की दवाई, बहन-बेटियों की सगाई और बेरोजगार की कमाई में हुयी क्षति को पूर्ति किया जाए,समस्त कृषि ऋण माफ किया जाए,कृषि कार्य में लगे सभी मजदूरों को मजदूरी का भुगतान जी-राम जी (मनरेगा) योजना से किया जाए और कृषि को उद्योग का दर्जा दिया जाए।



