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Friday, August 29, 2025
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शहीद रामचंद्र विद्यार्थी प्रजापति: एक अमर गाथा

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पटना, जितेन्द्र कुमार सिन्हा।

पटना में ‘शहीद रामचंद्र विद्यार्थी प्रजापति’ की प्रतिमा का अनावरण-

पटना के फतेहपुर गाँव में 14 अगस्त को इतिहास के एक स्वर्णिम अध्याय को फिर से जीवंत किया गया। यह अवसर था स्वतंत्रता संग्राम के वीर सपूत, शहीद रामचंद्र विद्यार्थी प्रजापति की भव्य प्रतिमा के अनावरण का।

यह केवल एक मूर्ति का उद्घाटन नहीं था, बल्कि उन सभी गुमनाम नायकों के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक था, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।

इस कार्यक्रम ने उन बलिदानियों को एक बार फिर से याद किया, जिनके त्याग और बलिदान के कारण ही हम आज आजाद भारत में सांस ले रहे हैं।

मुख्य अतिथि और गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति
इस ऐतिहासिक कार्यक्रम की मुख्य अतिथि बिहार बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य शीला पंडित प्रजापति थीं। उन्होंने प्रतिमा का अनावरण करते हुए कहा कि शहीद रामचंद्र विद्यार्थी प्रजापति ने मात्र 13 वर्ष की अल्पायु में ही देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। उनका यह साहस और देशप्रेम आज भी हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है।

समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता और छात्र-छात्राएं मौजूद थे। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि देने से हुई।

शहीद के बलिदान की सराहना-

इस अवसर पर सुरेंद्र प्रजापति ने शहीद रामचंद्र विद्यार्थी प्रजापति को इतिहास की ऐसी मशाल बताया, जिसके त्याग ने हमें स्वतंत्रता दी। उन्होंने कहा कि उनका बलिदान देश के इतिहास में एक अमिट छाप छोड़ गया है। डॉ. कमलेश प्रजापति ने शहीद के संघर्षपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उन्होंने कम उम्र में ही अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आवाज उठाई थी। उनकी देशभक्ति की भावना आने वाली पीढ़ियों को हमेशा प्रेरित करती रहेगी।

सरकार से विशेष दिवस मनाने की मांग-

कार्यक्रम के दौरान स्कूल के छात्रों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए, जिससे पूरा माहौल देशप्रेम से भर गया। डॉ. अरुण प्रजापति ने बिहार सरकार से एक विशेष मांग की। उन्होंने अनुरोध किया कि हर साल “रामचंद्र बलिदान दिवस” मनाया जाए, ताकि नई पीढ़ी को उनके योगदान के बारे में पता चले और वे देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझ सकें।
इस मौके पर लाल बिहारी प्रजापति, मनीष प्रजापति, गंगासागर प्रजापति, इंद्रदेव प्रजापति सहित कई ग्रामीणों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर शहीद को नमन किया।

आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा-

यह आयोजन सिर्फ एक स्मारक का उद्घाटन नहीं था, बल्कि एक गहरा संदेश था कि देश को आजाद कराने वाले वीरों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। शहीद रामचंद्र विद्यार्थी प्रजापति का जीवन, संघर्ष और बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा का स्रोत है। उनका 13 साल की छोटी उम्र में किया गया बलिदान देशभक्ति का सर्वोच्च उदाहरण है। आजादी के इस अमृत महोत्सव के दौर में, ऐसे आयोजन हमें याद दिलाते हैं कि आज जो स्वतंत्रता हमें मिली है, वह अनगिनत बलिदानों का परिणाम है। फतेहपुर गाँव में स्थापित यह प्रतिमा उनकी यादों को जीवित रखेगी और आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देती रहेगी कि सच्चा देशप्रेम त्याग और सेवा में निहित है।

Patna| Martyr Ramchandra Vidhyarthi Prajapati’ Statue Unveiled in Fatehpur

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