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जन्म-मृत्यु पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव, 2 साल से अधिक की देरी पर अब कोर्ट के आदेश से ही बनेगा प्रमाण पत्र

Bettiah, रवि कुमार मिश्रा।

बेतिया/नरकटियागंज। जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सटीक और सख्त बनाने के लिए केंद्र सरकार के विधि एवं न्याय मंत्रालय ने नए नियमों को अधिसूचित किया है। जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 2026 लागू होने के बाद अब प्रखंड प्रशासन आम नागरिकों को नई नियमावली के तहत ही पंजीकरण कराने के प्रति जागरूक कर रहा है।

प्रखंड विकास पदाधिकारी सूरज कुमार सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि 06 अगस्त 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित इस कानून के जरिए 1969 के मूल अधिनियम की धारा 13 में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, देरी से होने वाले पंजीकरण की शर्तें काफी सख्त कर दी गई हैं। उन्होंने बताया कि देरी से पंजीकरण के लिए लागू हुए नए प्रावधान के तहत यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के 1 वर्ष बाद और 2 वर्ष के भीतर दी जाती है, तो पंजीकरण केवल जिलाधिकारी या अनुमंडल पदादिकारी द्वारा प्राधिकृत कार्यपालक मजिस्ट्रेट के लिखित आदेश पर ही संभव होगा। इसके लिए निर्धारित शुल्क और दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य रहेगा। वही घटना के 2 वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद दी जाती है, तो प्रशासनिक स्तर पर पंजीकरण नहीं किया जा सकेगा। इसके लिए आवेदक को न्यायालय की शरण लेनी होगी और प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही प्रमाण पत्र जारी हो सकेगा। बीडीओ ने स्पष्ट किया कि अधिनियम के तहत कार्यपालक मजिस्ट्रेट का अर्थ ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023’ की धारा 14(1) के अधीन नियुक्त अधिकारियों से है।प्रखंड प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी जन्म या मृत्यु की घटना का पंजीकरण 1 वर्ष के भीतर अनिवार्य रूप से करा लें। समय पर पंजीकरण न कराने पर आवेदकों को अनुमंडल व जिला कार्यालयों के अलावा 2 साल से अधिक देरी होने पर न्यायालय के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।

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