देशवाणी। आशा कुमारी
मोतिहारी।
किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराने और खाद की कालाबाजारी पर प्रभावी रोक लगाने के उद्देश्य से कृषि विभाग ने नई डिजिटल व्यवस्था लागू कर दी है। यह व्यवस्था एक सितंबर से पूर्वी चंपारण सहित राज्य के 19 जिलों में लागू की गई है। पूर्वी चंपारण जिले में 3 सितंबर से खुदरा उर्वरक विक्रेताओं को उपलब्ध कराई गई पीओएस (POS) मशीनों को अपडेट कर नई प्रणाली के अनुरूप कर दिया गया है।
नई व्यवस्था के तहत अब किसानों को खाद के लिए दुकानों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा विकसित मोबाइल एप के माध्यम से किसान घर बैठे अपनी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक की ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। इससे खाद वितरण व्यवस्था अधिक पारदर्शी, सरल और व्यवस्थित होने की उम्मीद है।
किसान मोबाइल एप पर आधार संख्या, ओटीपी या फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए लॉगिन कर सकेंगे। इसके बाद वे अपनी फसल और जरूरत के अनुसार उपलब्ध उर्वरक का चयन कर ऑनलाइन बुकिंग करेंगे। बुकिंग पूरी होने पर किसान के मोबाइल पर एक क्यूआर कोड जनरेट होगा।
किसान संबंधित उर्वरक विक्रेता के पास जाकर मोबाइल में प्राप्त क्यूआर कोड दिखाकर खाद प्राप्त कर सकेंगे। विभाग ने इस क्यूआर कोड की वैधता तीन दिनों के लिए निर्धारित की है। यदि निर्धारित अवधि के भीतर किसान खाद का उठाव नहीं करते हैं, तो क्यूआर कोड स्वतः निरस्त हो जाएगा और दोबारा बुकिंग करनी होगी।
कृषि विभाग का मानना है कि इस नई व्यवस्था से किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध होगा, अनावश्यक भीड़ और लंबी कतारों से राहत मिलेगी, वहीं खाद की जमाखोरी और कालाबाजारी पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
प्रभारी डीएओ रंजन राजीव ने बताया कि नई व्यवस्था के अनुसार जिले में खाद की बिक्री शुरू हो गई है और सभी खुदरा उर्वरक विक्रेताओं की पीओएस मशीनों को अपडेट कर दिया गया है। उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे डिजिटल प्रणाली का लाभ उठाते हुए ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से ही उर्वरक प्राप्त करें।



