बदहाल स्कूल में नवाचार और ग्रामीणों से संवाद का दिखा असर, बच्चों की उपस्थिति पहुंची करीब शत-प्रतिशत; छात्र का नवोदय में हुआ चयन।
Bettiah l देश वाणी lनौसाद आलम।लौरिया
शिक्षा प्रशासन में नवाचार, बेहतर कार्यप्रणाली और उत्कृष्ट पहल के लिए बेतिया निवासी एवं वर्तमान में मुजफ्फरपुर जिले के मोतीपुर प्रखंड में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के पद पर कार्यरत मनोज कुमार को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा), नई दिल्ली की ओर से उन्हें अवार्ड्स फॉर इनोवेशन एंड गुड प्रैक्टिसेज इन एजुकेशनल एडमिनिस्ट्रेशन (एआईईए) पुरस्कार के लिए नामित किया गया है। उनका चयन शिक्षा प्रशासन के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय नवाचार और उसके सकारात्मक परिणामों को देखते हुए किया गया है।
बिहार शिक्षा विभाग के प्राथमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से 21 अगस्त 2026 को जारी पत्र में मनोज कुमार को राष्ट्रीय सम्मेलन एवं पुरस्कार कार्यक्रम में शामिल होने का निर्देश दिया गया है। कार्यक्रम का आयोजन दो और तीन सितंबर 2026 को नई दिल्ली में होगा। मनोज कुमार के राष्ट्रीय सम्मान के लिए चयन की खबर से सूर्यपुरा सहित रोहतास और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है।
बदहाल स्कूल को बदलने की शुरू की पहल
मनोज कुमार जब रोहतास जिले के सूर्यपुरा प्रखंड में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के रूप में कार्यरत थे, तब उन्होंने महादलित बस्ती स्थित एक विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था सुधारने के लिए विशेष पहल की। विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति बेहद कम थी। स्कूल परिसर में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा रहता था, जबकि किचन शेड पर भी कब्जे की स्थिति थी। अभिभावकों और ग्रामीणों में बच्चों को नियमित स्कूल भेजने को लेकर भी जागरूकता की कमी थी।
मनोज कुमार ने समस्या को केवल विभागीय स्तर पर देखने के बजाय ग्रामीणों और अभिभावकों से सीधे संवाद शुरू किया। उन्होंने उन्हें शिक्षा के महत्व के बारे में समझाया और विद्यालय की व्यवस्था सुधारने में ग्रामीणों को भी भागीदार बनाया। लगातार संवाद, निगरानी और सामुदायिक सहयोग से विद्यालय का माहौल बदलने लगा।
करीब शत-प्रतिशत हुई बच्चों की उपस्थिति
लगातार प्रयास का असर यह हुआ कि विद्यालय में बच्चों की संख्या और नियमित उपस्थिति तेजी से बढ़ी। कुछ समय बाद बच्चों की उपस्थिति करीब शत-प्रतिशत तक पहुंच गई। स्कूल में पढ़ाई का बेहतर माहौल बनने के साथ अभिभावकों में भी बच्चों की शिक्षा के प्रति गंभीरता बढ़ी।
इसी महादलित बस्ती के एक छात्र का नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा में चयन हुआ। छात्र की सफलता ने ग्रामीणों का शिक्षा व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत किया। इसके बाद अन्य अभिभावक भी अपने बच्चों को नियमित स्कूल भेजने और उनकी पढ़ाई पर ध्यान देने के लिए प्रेरित हुए।
शिक्षा प्रशासन में नवाचार बना पहचान
मनोज कुमार का मानना रहा कि केवल सरकारी योजनाओं और विभागीय निर्देशों से शिक्षा व्यवस्था में अपेक्षित बदलाव नहीं लाया जा सकता। इसके लिए विद्यालय, शिक्षक, अभिभावक और समाज के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। सूर्यपुरा में उनके द्वारा किए गए प्रयास इसी सामुदायिक भागीदारी का उदाहरण बने।
वर्तमान में वे मुजफ्फरपुर के
मोतीपुर में प्रखंड शिक्षा के पद पर कार्यरत हैं। इससे पहले वे सूर्यपुरा प्रखंड में बीईओ के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। शिक्षा प्रशासन में नवाचार और प्रभावी कार्यप्रणाली के लिए राष्ट्रीय स्तर पर उनका चयन सूर्यपुरा और रोहतास के साथ-साथ बिहार के लिए भी गौरव की बात मानी जा रही है
शिक्षकों ने दी बधाई
मनोज कुमार के राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामित होने पर स्थानीय शिक्षकों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने उन्हें बधाई दी है। शिक्षकों का कहना है कि एक ऐसे अधिकारी का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान के लिए चयन होना, जिसने जमीनी स्तर पर शिक्षा व्यवस्था में बदलाव लाने का प्रयास किया, अन्य शिक्षाधिकारियों और शिक्षकों के लिए भी प्रेरणादायी है।



