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Saturday, July 25, 2026
Homeबिहारमोतिहारीनगर निगम को हर साल करीब 2 करोड़ का राजस्व घाटा

नगर निगम को हर साल करीब 2 करोड़ का राजस्व घाटा

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-जिला परिषद की 2,000 से अधिक दुकानों से नहीं मिल रहा एक रुपया कर

-नगर आयुक्त को ज्ञापन सौंप कर सशक्त स्थाई समिति के सदस्य धीरज जायसवाल ने उठाई मांग

-15 दिनों में कमिटी गठित कर कर-निर्धारण और बकाया वसूली की अपील

देश वाणी। दिलीप दुबे

मोतिहारी। नगर निगम क्षेत्र अंतर्गत अवस्थित जिला परिषद की व्यावसायिक परिसंपत्तियों से नगर निगम को एक रुपये के भी राजस्व की प्राप्ति नहीं हो रही है, जिससे निगम को प्रतिवर्ष लगभग दो करोड़ रुपये से अधिक के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस गंभीर जनहित के मुद्दे को लेकर वार्ड संख्या 18 के नगर पार्षद सह सशक्त स्थाई समिति के सदस्य संजय कुमार जायसवाल उर्फ धीरज जायसवाल ने नगर आयुक्त को एक पत्र सौंपकर त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

ज्ञापन में धीरज जायसवाल ने उल्लेख किया है कि वर्ष 1972 में चंपारण जिले के विभाजन के बाद जिला परिषद मोतिहारी एक स्वतंत्र इकाई के रूप में अस्तित्व में आया था। तब से लेकर आज तक जिला परिषद अपने क्षेत्र में दुकानों और व्यावसायिक भवनों का निर्माण कराकर राजस्व की वसूली करता आ रहा है। हालांकि, मोतिहारी के नगरपालिका से नगर निगम में अपग्रेड होने के बावजूद, जिला परिषद के तहत आने वाली दुकानों, होटलों, व्यावसायिक परिसरों, दुकानों के ऊपरी तलों तथा खाली जमीनों पर बनी झोपड़ीनुमा दुकानों से नगर निगम को कोई टैक्स नहीं मिल रहा है।

एक अनुमान के अनुसार, निगम क्षेत्र में जिला परिषद की लगभग 2,000 से अधिक दुकानें, होटल, व्यावसायिक परिसर और अस्थायी दुकानें संचालित हो रही हैं। इन व्यावसायिक गतिविधियों से करोड़ों का कारोबार तो हो रहा है, लेकिन नगर निगम प्रशासन की उदासीनता और कर निर्धारण न होने की वजह से निगम की झोली खाली है और हर साल लगभग 2 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। पार्षद ने सुझाव दिया है कि नगर निगम एक पारदर्शी कमिटी का गठन करे, जो 15 कार्य दिवसों के भीतर जिला परिषद की सभी परिसंपत्तियों, दुकानों और आवंटियों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करे। नगर निगम के सभी तहसीलदारों एवं कर संग्रहकों को 15 दिनों के अंदर अपने-अपने वार्डों में स्थित ऐसी तमाम दुकानों और व्यावसायिक परिसरों का ब्योरा जुटाने का निर्देश दिया जाए। पुराने नगर परिषद क्षेत्र (वार्ड 1 से 38) में पड़ने वाली दुकानों से वर्ष 2013 से बकाया कर एवं ट्रेड लाइसेंस शुल्क वसूला जाए। जबकि नए शामिल किए गए क्षेत्रों में पड़ने वाली दुकानों से वर्ष 2022 से कर की वसूली सुनिश्चित की जाए।

पार्षद धीरज जायसवाल का कहना है कि यदि जिला परिषद की दुकानों एवं व्यावसायिक भवनों का सही तरीके से कर निर्धारण कर ट्रेड लाइसेंस और होल्डिंग/व्यावसायिक टैक्स की वसूली की जाए, तो नगर निगम के राजस्व में ऐतिहासिक वृद्धि होगी। इस राशि का उपयोग मोतिहारी शहर के विकास, सफाई व्यवस्था और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने में किया जा सकेगा। अब देखना यह है कि इस गंभीर विषय पर नगर निगम प्रशासन क्या कदम उठाता है।

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