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मखाना उत्पादन की नई तकनीकों से रूबरू हुए किसान

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-पूर्वी चम्पारण जिले की जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ मखाना खेती के लिए अनुकूल

माला सिन्हा 

पीपराकोठी : स्थानीय पंडित दीनदयाल उपाध्याय उधान एवं वानिकी महाविद्यालय में आज “मखाना आधारित उद्यानिकी उत्पादन प्रणाली : किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में एक सशक्त कदम” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. प्रशिक्षण के दौरान किसानों को मखाना की उन्नत खेती, फसल प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण, मूल्य संवर्धन तथा विपणन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियाँ दी की गईं. विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक तकनीकों एवं वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर किसान मखाना उत्पादन में वृद्धि कर अधिक लाभ अर्जित कर सकते हैं. साथ ही, किसानों को महाविद्यालय परिसर में स्थापित मखाना प्रदर्शन इकाई का भ्रमण कराया गया, जहाँ उन्हें मखाना की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीकों का व्यावहारिक प्रदर्शन दिखाया गया.

इस अवसर पर महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. कुंदन किशोर ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार देश में मखाना उत्पादन का प्रमुख केंद्र है तथा पूर्वी चम्पारण जिले की जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियाँ इसकी खेती के लिए अत्यंत अनुकूल हैं. उन्होंने कहा कि किसान वैज्ञानिक तरीके से मखाना की खेती कर अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं. साथ ही, मखाना आधारित उत्पादन प्रणाली ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन का एक प्रभावी माध्यम बन सकती है. उन्होंने किसानों से नवीन तकनीकों को अपनाने तथा वैज्ञानिक खेती को बढ़ावा देने का आह्वान किया.

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए महात्मा गांधी समेकित कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. राघवेन्द्र सिंह ने समेकित कृषि प्रणाली के महत्व पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि मखाना समेकित कृषि प्रणाली का एक महत्वपूर्ण घटक है, जिसे अन्य कृषि एवं उद्यानिकी गतिविधियों के साथ जोड़कर किसानों की आय में वृद्धि की जा सकती है. डॉ. सुधीर दास ने कहा कि इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य किसानों को मखाना उत्पादन की नवीन एवं उन्नत तकनीकों से परिचित कराना है, ताकि वे कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय में वृद्धि कर सकें. कार्यक्रम में पूर्वी चम्पारण जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए 50 किसानों ने भाग लिया. प्रशिक्षण के दौरान किसानों ने मखाना की खेती से संबंधित विभिन्न समस्याओं एवं जिज्ञासाओं पर विशेषज्ञों के साथ खुलकर चर्चा की तथा उनके व्यावहारिक समाधान प्राप्त किए. कार्यक्रम में महाविद्यालय के सभी शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित थे.

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