डुमरियाघाट। देशवाणी।
डुमरियाघाट में भव्य स्वागत, ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंजा क्षेत्र
मोतिहारी। आस्था जब परंपरा, अनुशासन और समन्वय के साथ आगे बढ़ती है, तो वह केवल पूजा-पाठ का विषय नहीं रह जाती, बल्कि एक गहरे सांस्कृतिक संवाद का माध्यम बन जाती है। पूर्वी चम्पारण के कैथवलिया में निर्माणाधीन ‘विराट रामायण मंदिर’ में स्थापित होने वाला दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग इसका जीवंत उदाहरण है।
सोमवार को जैसे ही इस विशाल शिवलिंग ने डुमरियाघाट पुल के रास्ते नारायणी नदी को पार कर चम्पारण की धरती पर कदम रखा, पूरा इलाका ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गुंजायमान हो गया। कड़ाके की ठंड और शीतलहर के बावजूद श्रद्धालुओं का जोश देखते ही बन रहा था।
45 दिनों की लंबी यात्रा के बाद चम्पारण की सीमा में प्रवेश-
तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 21 नवंबर को रवाना हुआ यह शिवलिंग लगभग 45 दिनों की लंबी यात्रा तय कर यहां पहुंचा है। इस दौरान यह पावन प्रतीक तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से होकर गुजरा। सड़क मार्ग से इसे 96 चक्कों वाले एक विशेष ट्रक के जरिए लाया गया है। डुमरियाघाट पुल पार करते ही श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा कर और अक्षत-चंदन लगाकर शिवलिंग का अभिनंदन किया। विश्रामपुर दुबौली, रामपुर खजुरिया, हुसैनी बेनीपुर और नयागांव जैसे प्रमुख स्थानों पर हजारों की संख्या में नर-नारी इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने के लिए घंटों टकटकी लगाए खड़े रहे।
ब्लैक ग्रेनाइट से निर्मित है 33 फीट ऊंचा यह शिवलिंग-
दुनिया के इस सबसे बड़े शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलीपुरम स्थित पट्टीकाडु गांव में पिछले दस वर्षों से किया जा रहा था। 33 फीट ऊंचे इस शिवलिंग का निर्माण दुर्लभ ब्लैक ग्रेनाइट पत्थर से हुआ है। अब इसे मोतिहारी के कल्याणपुर प्रखंड के कैथवलिया (जानकीनगर) में स्थापित किया जाएगा, जहाँ विश्व का सबसे विशाल मंदिर—विराट रामायण मंदिर—आकार ले रहा है। स्थानीय लोगों के लिए यह न केवल धार्मिक गौरव का विषय है, बल्कि चम्पारण की धरती पर एक नए आध्यात्मिक युग की शुरुआत भी है।
Motihari |Raxaul | World’s largest Shivling arrives in East Champaran; sea of devotees gather.












